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गुरु-शनि 60 साल बाद उच्च राशि में

136 दिन तक रहेगी यह स्थिति, पिछली बार 1954 में बना था संयोग, अगला 2073 में
देवराज वृहस्पति (गुरु) और शनि ग्रह 60 साल बाद एक साथ अपनी-अपनी उच्च राशि में आएंगे। शनि उच्च राशि तुला में पहले ही भ्रमण कर रहे हंै। अब 19 जून को गुरु भी मिथुन राशि से अपनी उच्च राशि कर्क में आ जाएंगे। यह संयोग 136 दिन तक रहेगा। गुरु 19 जून को सुबह 8.47 बजे पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र, आयुष्मान योग और कुंभ राशि के चंद्रमा में कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। 12 साल बाद गुरु अपनी उच्च राशि में आएंगे जो 14 जुलाई 2015 तक रहेंगे। पंडितों के अनुसार इससे पहले सितंबर 1954 से पांच महीने के लिए दोनों अपनी-अपनी उच्च राशि में थे। अगला संयोग वर्ष 2073 में बनेगा। (पंचांग श्री मार्तंड के अनुसार ) नवंबर में शनि वृश्चिक में जाएगा 2 नवंबर को शनि तुला से वृश्चिक राशि में परिवर्तन करेगा। मंगल प्रधान वृश्चिक राशि में शनि के आने से कन्या राशि वाले लोगों की साढ़े साती खत्म हो जाएगी और धनु राशि वालों की शुरू हो जाएगी। कर्क, मीन राशि शनि के ढय्या से मुक्त होगी, वहीं सिंह-मेष पर यह शुरू होगा। ऐसे बना संयोग शनि करीब ढाई साल तक एक राशि में रहता है। 30 साल में शनि 12 राशियों का भ्रमण कर उच्च राशि में आता है। गुरु 12 साल में 12 राशियों का भ्रमण कर उच्च राशि में आता है। गुरु के राशि परिवर्तन को लेकर पंचांगों में मतभेद है। कई पंचांगों ने 10 जून को गुरु का राशि परिवर्तन बताया है, जबकि ज्यादातर पंचांगों ने 19 जून को। ज्यादातर पंडितों ने भी यही माना है। यह होगा गुरु के कर्क राशि में होने से सभी 12 राशियों की कन्याओं को गुरु बल प्राप्त होगा। यानी, विवाह योग्य लड़कियों को गुरु बल देखने की जरूरत नहीं होगी। शनि और गुरु के उच्च राशि में होने की अवधि में जो बच्चे जन्म लेंगे, उनकी कुंडली प्रभावशाली रहेगी। शिक्षा का स्तर ऊंचा होगा। न्याय व्यवस्थाओं में और बेहतर सुधार होगा। विदेश में भारत की साख और बढ़ेगी। उन्होंने कहा वर्तमान में शनि और राहु एक राशि में हैं। जुलाई में राहु के राशि परिवर्तन के बाद गुरु और शनि के उच्च राशि में होने का फल और बढ़ जाएगा। मेष, धनु ; धन हानि वृषभ ; शारीरिक कष्ट मिथुन और वृश्चिक ; धन लाभ कर्क, सिंह, कुंभ ; कष्ट कन्या, तुला ; प्रगति मकर ; समान मीन ; सुख, समान राशि और असर संयोगत्नशनि पहले से ही उच्च राशि तुला में, गुरु 19 जून को कर्क में आएंगे, सभी राशियों की कन्याओं को गुरु बल प्राप्त होगा।
शुभता के लिए गुरुवार को क्या दान करें
* पीले पुष्प, पीला वस्त्र, शक्कर, घोड़ा (लकड़ी या खिलौना घोड़ा), चने की दाल, हल्दी, ताजे फल, नमक, स्वर्णपत्र, कांस्य आदि का दान करने से बृहस्पति का अशुभ प्रभाव समाप्त हो जाता है। इससे गुरु के शुभ प्रभाव में भी वृद्धि होती है।

* सफेद सरसों, सफेद फूल, चमेली के पुष्प, गूलर, दमयंती, मुलहठी और शहद मिश्रित जल से स्नान करने पर बृहस्पति के अशुभ प्रभाव कम होकर पीड़ाओं से मुक्ति मिलती है। इससे भी गुरु के शुभ प्रभाव में तत्काल वृद्धि होती है।

 

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