×

२०१४धनतेरसपूजा, धनत्रयोदशीपूजा

21st अक्टूबर2014
(मंगलवार)

 

धनतेरसपूजामुहूर्त = १९:१९से२०:२४

अवधि = १घण्टा४मिनट
प्रदोषकाल = १७:५२से२०:२४
वृषभकाल = १९:१९से२१:१७

त्रयोदशीतिथिप्रारम्भ =२०/अक्टूबर/२०१४को२३:२१बजे
त्रयोदशीतिथिसमाप्त =२२/अक्टूबर/२०१४को०१:१२बजे

Dhan teras pujan samgri

Jharu

Supa

kauri

Dhania

1.5 kg genhu

चांदी की कील

लक्ष्मी-गणेश और कुबेर की मूर्ति

दसकेनोटकीगड्डी

सातहल्दीकीगाँठ, कमलगट्टा, कौड़ी, लालसिन्दूर

सात धान्य गेंहूं, उडद, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर

लक्ष्मी जी व गणेश जी की चांदी की प्रतिमाओं को इस दिन घर लाना, घर- कार्यालय,. व्यापारिक संस्थाओं में धन, सफलता व उन्नति को बढाता है.

ताँबे, पीतल, चाँदी के गृह-उपयोगी नवीन बर्तन

इस दिन धन (वस्तु) खरीदने से उसमें 13 गुणा वृद्धि होती है। इस अवसर पर धनिया के बीज खरीद कर भी लोग घर में रखते हैं। दीपावली के बाद इन बीजों को लोग अपने बाग-बगीचों में या खेतों में बोते हैं।

जो प्राणी धनतेरस की शाम यम के नाम पर दक्षिण दिशा में दीया जलाकर रखता है उसकी अकाल मृत्यु नहीं होती है। इस मान्यता के अनुसार धनतेरस की शाम लोग आँगन मे यम देवता के नाम पर दीप जलाकर रखते हैं। दीपक पूरी रात्रि जलाना चाहिए. इस दीपक में कुछ पैसा व कौडी भी डाली जाती है.

शुभ मुहूर्त समय में पूजन करने के साथ सात धान्यों की पूजा की जाती है. सात धान्य गेंहूं, उडद, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर है. सात धान्यों के साथ ही पूजन सामग्री में विशेष रुप से स्वर्णपुष्पा के पुष्प से भगवती का पूजन करना लाभकारी रहता है. इस दिन पूजा में भोग लगाने के लिये नैवेद्ध के रुप में श्वेत मिष्ठान्न का प्रयोग किया जाता है. साथ ही इस दिन स्थिर लक्ष्मी का पूजन करने का विशेष महत्व है.

धन तेरस की पूजा शुभ मुहुर्त में करनी चाहिए. सबसे पहले तेरह दीपक जला कर तिजोरी में कुबेर का पूजन करना चाहिए. देव कुबेर का ध्यान करते हुए, भगवान कुबेर को फूल चढाएं और ध्यान करें, और कहें, कि हे श्रेष्ठ विमान पर विराजमान रहने वाले, गरूडमणि के समान आभावाले, दोनों हाथों में गदा व वर धारण करने वाले, सिर पर श्रेष्ठ मुकुट से अलंकृ्त शरीर वाले, भगवान शिव के प्रिय मित्र देव कुबेर का मैं ध्यान करता हूँ.

 
कुबेरपूजाविधि

आपकेपासश्रीकुबेरकीमूर्तिहैतोवहपूजामेंउपयोगकीजासकतीहै।अगरआपकेपासकुबेरकीमूर्तिनहींहैतोउसकेबदलेआपतिजोरीयागहनोंकेबक्सेकोश्रीकुबेरकेरूपमेंमानियेऔरउसकीपूजाकीजिये।तिजोरी, बक्सेआदिकीपूजासेपहलेसिन्दूरसेस्वस्तिक-चिह्नबनानाचाहिएऔरउसपर ‘मोली’ बाँधनाचाहिए।

  1. ध्यान (Dhyana)

 

दीवालीकेदौरानश्रीकुबेरपूजा

अर्थात् – मानव-स्वरूपविमानपरविराजमान, श्रेष्ठगरुड़केसमानसभीनिधियोंकेस्वामी, भगवान्शिवकेमित्र, मुकुटआदिसेसुशोभितऔरहाथोंमेंवर-मुद्राएवंगदाधारणकरनेवालेभव्यश्रीकुबेरकीमैंवन्दनाकरताहूँ। 

  1. आवाहन (Aavahan)

भगवान्श्रीकुबेरकाध्यानकरनेकेबादतिजोरी-बक्सेआदिकेसम्मुखआवाहन-मुद्रादिखाकर, निम्नमन्त्रद्वाराउनकाआवाहनकरे।

अर्थात् – हेदेव, सुरेश्वर! मैंआपकाआवाहनकरताहूँ।आपयहाँपधारें, कृपाकरें।सदामेरेभण्डारकीवृद्धिकरेंऔररक्षाकरें। 

॥मैंश्रीकुबेरदेवकाआवाहनकरताहूँ॥

  1. पुष्पाञ्जलि-१ (Pushpanjali-1)

आवाहनकरनेकेबादनिम्नमन्त्रपढ़करश्रीकुबेरदेवकेआसनकेलिएपाँचपुष्पअञ्जलिमेंलेकरअपनेसामने, तिजोरी-बक्सेआदिकेनिकटछोड़े।

अर्थात् – हेदेवताओंकेईश्वर! विविधप्रकारकेरत्नसेयुक्तस्वर्ण-सज्जितआसनकोप्रसन्नताहेतुग्रहणकरें। 

॥भगवान्श्रीकुबेरकेआसनकेलिएमैंपाँचपुष्पअर्पितकरताहूँ॥

  1. पुष्पाञ्जलि-२ (Pushpanjali-2)

इसकेबाद ‘चन्दन-अक्षत-पुष्प-धूप-दीप-नैवेद्य’ सेभगवान्श्रीकुबेरकापूजननिम्नमन्त्रोंद्वाराकरे।

  1. पुष्पाञ्जलि-३ (Pushpanjali-3)

इसप्रकारपूजनकरनेकेबादबाएँहाथमेंगन्ध, अक्षत, पुष्पलेकरदाहिनेहाथद्वारानिम्नमन्त्रपढ़तेहुए ‘तिजोरी-बक्से’ आदिपरछोड़े।

अर्थात् – श्रीकुबेरकोनमस्कार! इसपूजनसेश्रीकुबेरभगवान्प्रसन्नहों, उन्हेंबारम्बारनमस्कार।

धनत्रयोदशीयाधनतेरसकेदौरानलक्ष्मीपूजाकोप्रदोषकालकेदौरानकियाजानाचाहिएजोकिसूर्यास्तकेबादप्रारम्भहोताहैऔरलगभग२घण्टे२४मिनटतकरहताहै।

धनतेरसपूजाकोकरनेकेलिएहम चौघड़िया मुहूर्त कोदेखनेकीसलाहनहींदेतेहैंक्योंकिवेमुहूर्तयात्राकेलिएउपयुक्तहोतेहैं।धनतेरसपूजाकेलिएसबसेउपयुक्तसमयप्रदोषकालकेदौरानहोताहैजब स्थिर लग्न प्रचलितहोतीहै।ऐसामानाजाताहैकिअगरस्थिरलग्नकेदौरानधनतेरसपूजाकीजायेतोलक्ष्मीजीघरमेंठहरजातीहै।इसीलिएधनतेरसपूजनकेलिएयहसमयसबसेउपयुक्तहोताहै।वृषभलग्नकोस्थिरमानागयाहैऔरदीवालीकेत्यौहारकेदौरानयहअधिकतरप्रदोषकालकेसाथअधिव्याप्तहोताहै।

धनतेरसपूजाकोधनत्रयोदशीकेनामसेभीजानाजाताहै।धनतेरसकादिन धन्वन्तरि त्रयोदशी या धन्वन्तरि जयन्ती, जोकिआयुर्वेदकेदेवताकाजन्मदिवसहै, केरूपमेंभीमनायाजाताहै।

इसीदिनपरिवारकेकिसीभीसदस्यकीअसामयिकमृत्युसेबचनेकेलिएमृत्युकेदेवतायमराजकेलिएघरकेबाहरदीपकजलायाजाताहैजिसेयमदीपमकेनामसेजानाजाताहैऔरइसधार्मिकसंस्कारकोत्रयोदशीतिथिकेदिनकियाजाताहै।

OM GURUDEVAY NAMAH

        OM GURUDEVAY NAMAH

YOGI BABA Ji
Address : Yogi baba Vashikaran Dham, Mukti Dham Ashram, Shamsan Ghat, Har ki Pauri, Haridwar, Uttrakhand.
Contact # +91-9582534769

Contact Us!
Your message was successfully sent!



9 + 8 =