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Husband Wife //जीवनसाथी से अनबन का कारण 

क्या आपके लाइफ पार्टनर से आपकी नहीं बनती है? यदि आपका जीवनसाथी आपके रिश्ते को लेकर उदासीन है। हर छोटी सी बात आपसी अनबन का कारण बन गई हैं।
कहीं इसका कारण आपके घर का वास्तु तो नहीं है। घर का वास्तु सीधा संबंधो को प्रभावित करता है। अगर आपके लाइफ पार्टनर से आपकी नहीं बनती तो। आइये जानते हैं कुछ ऐसे ही वास्तुदोष जिनके होने पर पति-पत्नी के सबंधों को बुरी प्रभावित करते हैं।
इसलिए घर का वातावरण ऐसा होना चाहिए कि ऋणात्मक शक्तियां कम तथा सकारात्मक शक्तियां अधिक क्रियाशील हों। यह सब वास्तु के द्वारा ही संभव हो सकता है।
घर के ईशान कोण का बहुत ही महत्व है। यदि पति-पत्नी साथ बैठकर पूजा करें तो उनका आपस का अहंकार खत्म होकर संबंधों में मधुरता बढ़ेगी। गृहलक्ष्मी द्वारा संध्या के समय तुलसी में दीपक जलाने से नकारात्मक शक्तियों को कम किया जा सकता है। घर के हर कमरे के ईशान कोण को साफ रखें, विशेषकर शयनकक्ष के।पति-पत्नी में आपस में वैमनस्यता का एक कारण सही दिशा में शयनकक्ष का न होना भी है।
अगर दक्षिण-पश्चिम दिशाओं में स्थित कोने में बने कमरों में आपकी आवास व्यवस्था नहीं है तो प्रेम संबंध अच्छे के बजाए, कटुता भरे हो जाते हैं।शयनकक्ष के लिए दक्षिण दिशा निर्धारित करने का कारण यह है कि इस दिशा का स्वामी यम, शक्ति एवं विश्रामदायक है। घर में आराम से सोने के लिए दक्षिण एवं नैऋत्य कोण उपयुक्त है। शयनकक्ष में पति-पत्नी का सामान्य फोटो होने के बजाए हंसता हुआ हो, तो वास्तु के अनुसार उचित रहता है।
घर के अंदर उत्तर-पूर्व दिशाओं के कोने के कक्ष में अगर शौचालय है तो पति-पत्नी का जीवन बड़ा अशांत रहता है। आर्थिक संकट व संतान सुख में कमी आती है। इसलिए शौचालय हटा देना ही उचित है। अगर हटाना संभव न हो तो शीशे के एक बर्तन में समुद्री नमक रखें। यह अगर सील जाए तो बदल दें। अगर यह संभव न हो तो मिट्टी के एक बर्तन में सेंधा नमक डालकर रखें।
घर के अंदर यदि रसोई सही दिशा में नहीं है तो ऐसी अवस्था में पति-पत्नी के विचार कभी नहीं मिलेंगे। रिश्तों में कड़वाहट दिनों-दिन बढ़ेगी। कारण अग्नि का कहीं ओर जलना। रसोई घर की सही दिशा है आग्नेय कोण। अगर आग्नेय दिशा में संभव नहीं है तो अन्य वैकल्पिक दिशाएं हैं। आग्नेय एवं दक्षिण के बीच, आग्नेय एवं पूर्व के बीच, वायव्य एवं उत्तर के बीच।यदि हम अपने वैवाहिक जीवन को सुखद एवं समृद्ध बनाना चाहते हैं और अपेक्षा करते हैं कि जीवन के सुंदर स्वप्न को साकार कर सकें।
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मोर पंख मिटाएगा वास्तुदोष——-

मोर पंख को सम्मोहन का प्रतीक माना गया है। घर में मोर पंख रखना प्राचीनकाल से ही बहुत शुभ माना जाता है। वास्तु के अनुसार भी मोर पंख घर से अनेक प्रकार के वास्तुदोष दूर करता है। मोर पंख सकारात्मक उर्जा को अपनी तरफ खीचता है। मोर पंख को वास्तु के अनुसार बहुत उपयोगी माना गया है।
– मोर का एक पंख लेकर उसे दक्षिणामुखी राधा कृष्ण की मूर्ति के मुकुट में लगाएं। मूर्ति में मोर पंख चालीस दिन के लिए स्थापित कर दें और राधा कृष्ण को रोज भोग लगाएं। इकतालिसवे दिन उस मोर पंख को घर लाकर अपनी तिजोरी में रखें।
– घर के दक्षिण-पूर्वी कोने में मोर का पंख लगाने से भी घर में बरकत बढ़ती है।
– यदि घर की उत्तर- पश्चिमी कोने में रखें तो जहरीले जानवरों का भय नहीं रहता है।
– अपनी जेब या डायरी में मोर पंख रखने पर राहु दोष कभी प्रभावित नहीं करता है।
– नवजात बालक के सिर की तरफ चांदी की एक डिब्बी में भरकर उसके सिरहाने रखने से नजर नहीं लगती है।
इसे पुस्तको में रखना भी बहुत शुभ माना जाता है।
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नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मक ऊर्जा में बदलें ऐसे———————-

भारतीय वास्तु और फेंगशुई के अनुसार क्रिस्टल बॉल में से ऐसी उर्जात्मक किरणे निकलती है।
जो हमारे वातावरण में फैले हुए नकारात्मक तत्वों एवं दोषों को समाप्त कर देती है। क्योंकि क्रिस्टल एक ऐसा यांत्रिक यंत्र है तो नकरात्मक एवं दोषपूर्ण उर्जा को सकारात्मक एवं दोष रहित ऊर्जा में परिवर्तित करता है।इसे हम अपने ऑफिस, घर, दुकान में रख सकते हैं। रेकी मास्टर अपने योग बल से इसकी ऊर्जा शक्ति को बढ़ा देते है। यदि कोई व्यक्ति बहुत लम्बे समय से बीमार है एवं काफी इलाज के बाद भी वह पूर्ण रूप से स्वस्थ नहीं हो पा रहा है तो किसी रेकी मास्टर अपने योग बल से चार्ज किए हुए उस बॉल का प्रयोग करने से वह व्यक्ति बीमारी से निजात पा सकता है। इसे लगाकर अधिक से अधिक प्रकाश को आकर्षित किया जा सकता है। ऑफिस में रखने से इससे पूरे दिन माहौल में ताजगी का अनुभव होता है। यह अपने आप में एक अद्भुत वस्तु है।
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घर हमेशा धन-धान्य से भरा रहेगा ऐसे———

अगर आप चाहते हैं कि आपका घर हमेशा धन-धान्य से भरा रहे। उसके लिए के किचन में ये कुछ टिप्स आपके लिए लाभदायक सिद्ध हो सकते है।
– रसोई घर में यदि वास्तुदोष हो तो पंचररत्न को तांबे के कलश में डालकर उसे ईशान्य कोण यानी उत्तर-पूर्व के कोने में स्थापित करें।
– निर्माण के समय ध्यान रखे की रसोई घर आग्नेय कोण में हो अगर पूर्व में ही रसोईघर किसी और दिशा में बना हो तो उसमें लाल रंग कर उसका दोष दूर किया जा सकता हैं।
– रसोई घर के स्टेंड पर काला पत्थर न लगवाए।
– रसोई घर में माखन खाते हुए कृष्ण भगवान का चित्र लगाएं। इससे आपका घर हमेशा धन-धान्य से भरा रहेगा।
– खाना बनाते समय गृहिणी की पीठ रसोई के दरवाजे की तरफ न हो, यदि ऐसा हो तो गृहिणी के सामने दीवार पर एक आईना लगाकर दोष दूर किया जा सकता है।
– यदि रसोई का सिंक उत्तर या ईशान में न हो और उसे बदलना भी संभव न हो तो लकड़ी या बांस का पांच रोड वाला विण्ड चिम सिंक के ऊपर लगाएं।
– चूल्हा मुख्य द्वार से नहीं दिखना चाहिए। यदि ऐसा हो और चूल्हे का स्थान बदलना संभव नहीं हो तो पर्दा लगा सकते हैं।
– यदि घर में तुलसी का पौधा न हो तो अवश्य लगाएं। कई रोगों व दोषों का निवारण अपने आप हो जाएगा।
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घर की बाहरी रंगत करेगी वास्तुदोष दूर——–

यदि घर में कोई वास्तुदोष हो और आपको समझ नहीं आ रहा है कि उस वास्तुदोष से कैसे निपटा जाए तो आप केवल अपने मकान के मुंह की दिशा के अनुसार बाहरी दिवारों पर पेंट करवाकर अपने घर के वास्तुदोष को कम कर सकते हैं।
यदि आपका घर पूर्वमुखी हो तो फ्रंट में लाल, मेहरून रंग करें।
पश्चिममुखी हो तो लाल, नारंगी, सिंदूरी रंग करें।
उत्तरामुखी हो तो पीला, नारंगी करें।
दक्षिणमुखी हो तो गहरा नीला रंग करें।किचन में लाल रंग।बेडरूम में हल्का नीला, आसमानी। ड्राइंग रूम में क्रीम कलर
पूजा घर में नारंगी रंग।
शौचालय में गहरा नीला।
फर्श पूर्ण सफेद न हो क्रीम रंग का होना चाहिए।
छोटे उपाय जिनसे होगा बढ़ा लाभ
क्या आप घर के वास्तुदोष से परेशान है?
वास्तुदोष के कारण ही घर में कोई ना कोई समस्या हमेशा बनी रहती है। घर के सही वास्तु का मतलब ये कतई नहीं है, कि घर में तोड़-फोड़ ही कि जाए। घर के वास्तु में कुछ छोटे-छोटे परिवर्तन ऐसे होते हैं जिनको अपनाने से आप बड़ा लाभ पा सकते हैं।
– घर में अगर झगड़ा ज्यादा हो तो कैक्टस या कांटे वाले पौधे निकाल दें।
– मंदिर सदैव ईशान कोण में ही रखें।
– अलमारी को कभी दक्षिण मुखी न रखे।
– घर अगर दक्षिणमुखी हो तो फ्रंट में नीला रंग रखें।
– घर में कोई ज्यादा बीमार होता हो तो एक कटोरी में केशर घोल कर रखें।
– घर में बरकत न हो तो गणपति को घर में स्थापित करें।
– घर के मुख्य दरवाजे पर गणेश का बांयी सूण्ड वाला चित्र लगाएं।
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गृह प्रवेश से पहले जरूरी है———

क्या आप नए घर में प्रवेश करने जा रहे हैं? आप चाहते हैं कि नए घर में आपका जीवन खुशियों से भर जाए,हर परेशानी आपके जीवन को अलविदा कह जाए तो गृह प्रवेश से पहले नीचे लिखे सभी उपाय जरुर करें इससे आपका नया घर सकारात्मक उर्जा से भर जाएगा।
– वास्तु शांति कराएं, विधिवत वास्तु पूजन कराएं।
– गृह प्रवेश करें जिससे उन्नति होगी एवं समृद्धि होगी।
विधिवत गृह प्रवेश कराएं, वास्तु जप जरूर कराएं।
– देवी दुर्गा की अक्षत, लाल पुष्प, कुमकुम से पूजा करें। प्रसाद चढ़ाएं, धूप, दीप दिखाएं एवं जप करें। निश्चित ही घर में सुख, शांति एवं समृद्धि होगी। – दुर्गासप्तशती का नौ दिन तक पाठ विधिवत घी का अखंड दीपक लगाकर, उपरांत नौ कन्याओं का भोजन (2-10 वर्ष की कन्या) करवाने से जीवन सुखद होता है। –
महामृत्युंजय मंत्र का जप करें, इससे भी लाभ प्राप्त होता है।
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वैभव को बढ़ाता है ये पेंडेंट———————–

इस खास पैंडेंट को पुआ शैल पैंडेंट भी कहा जाता है। गणित के 8 अंक के आकार का यह पैंडेंट चीनी पद्धति में खास माना जाता है। इसके आठ के अंक में आने वाली गोलाई के एक तरफ क्रिस्टल लगे हैं तो दूसरी तरफ समुद्र के नीले रंग के कई शेड्स समाए हुए हैं। इन्हें पुआ रंग कहा जाता है।इस खूबसूरत गहने में नीले, हरे और बैंगनी रंग के विभिन्न शेड्स हैं जो रोशनी में रंग बदलते हुए से प्रतीत होते हैं।
एक ओर क्रिस्टल होने से इसके रंग और निखरकर आते हैं। क्रिस्टल की वजह से ही इन रंगों की चमक भी बढ़ जाती है। चीनी पद्धति में आठ अंक को बहुत लकी नंबर मानते हैं और फेंगशुई में यह बहुत ही खास माना जाता है।
कहते हैं कि यह निरंतर व अनंत वैभव प्रदान करता है। इसे असीमता का वैश्विक प्रतीक भी कहते हैं। कुल मिलाकर वैभव व असीमता का यह अनंत प्रतीक है। नंबर 8 को महत्वपूर्ण बनाने वाली खास बात यह है कि अब हम नंबर 8 के 20 साल के सर्कल में हैं, जो 2004 से शुरू होकर 2024 तक चलेगा।
पुआ सीपियों का ताल्लुक लंबे समय से माओरी लोगों से जोड़ा जाता रहा है। व्यापक जनसमूह में यह माना जाता है कि यह सीप जीवन के बहुत से पहलुओं को सामने रखता है। यह मस्तिष्क की स्पष्टता और आपसी सहयोग को बढ़ाता है।
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घर में रहेगी शांति——-
. पौधे अपने आसपास के वातावरण को साफ व स्वच्छ बनाते है। वास्तु के अनुसार पौधे लगाने से घर सकारात्मक उर्जा से भर जाता है। हरियाली आंखों को शांति देती है। घर में भी यदि वास्तु के अनुसार पौधे लगाए जाएं तो घर में शांति के साथ ही सुख, समृद्धि भी बढऩे लगती है। – ईशान्य कोण यानी उत्तर-पूर्व में तुलसी का पौधा लगाएं।
– घर की बैठक में जहां घर के सदस्य आमतौर पर एकत्र होते हैं, वहां बांस का पौधा लगाना चाहिए। पौधे को बैठक के पूर्वी कोने में गमले में रखें।
– नुकीले औजार जैसे- कैंची, चाकू आदि कभी भी इस प्रकार नहीं रखे जाने चाहिए कि उनका नुकीला बाहर की ओर हो।
– शयन कक्ष में पौधा नहीं रखना चाहिए, किन्तु बीमार व्यक्ति के कमरे में ताजे फूल रखने चाहिए। इन फूलों को रात को कमरे से हटा दें। –
मानसिक शांति प्राप्त करने के लिए चंदन आदि से बनी अगरबत्ती जलाएं। इससे मानसिक बेचैनी कम होती है।
– तीन हरे पौधे मिट्टी के बर्तनों में घर के अंदर पूर्व दिशा में रखें। बोनसाई व कैक्टस न लगाएं क्योंकि बोनसाइ प्रगति में बाधक एवं कैक्टस हानिकारक होता है।
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अपने घर की समस्या से जाने वास्तुदो——–
यदि आपका जीवन तनाव से घिरा है। हमेशा कोई ना कोई समस्या आपके परिवार को घेरे रहती है। ऐसा अक्सर घर में उपस्थित वास्तुदोष के कारण होता है लेकिन हम उससे अनजान होते हैं। घर में अलग- अलग कोने में वास्तुदोष का प्रभाव भी अलग होता है। पूर्व दिशा का स्वामी सूर्य है इसलिए इस दिशा में वास्तु दोष होने पर पिता-पुत्र की आपस में नहीं बनती। पुत्र पिता की आज्ञा का पालन नहीं करता। संतान की उन्नति में भी रूकावटे आती है। संतान का स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है। ईशान्य कोण यानी उत्तर पूर्व कोने का स्वामी गुरु होता है। इस कोने में दोष होने पर घर में पैसों से जुड़ी समस्या बनी रहती है। पूजा में मन नहीं लगता। घर के बच्चों का पढ़ाई में मन नहीं लगता है। उत्तर दिशा का स्वामी बुध होता है। इस दिशा में वास्तुदोष होने पर भाई-बहन में अधिक झगड़े होते हैं। आमदनी से अधिक खर्च होता है। दीपक भी दूर करता है वास्तुदोष…
हमारा शरीर पंच तत्व से बना है।
मिट्टी भी उन पंच तत्वों में से एक है।
मिट्टी से दीपक बनाने का रिवाज हमारे यहां का पुराने समय से चला आ रहा है
। मिट्टी को बहुत शुद्ध माना जाता है। इसलिए मिट्टी से बने दीपक आज भी पूजन में भगवान के सामने प्रज्वलित किए जाते हैं।
साथ ही मिट्टी का दीपक जलाने से घर से कई तरह के वास्तुदोष भी दूर हो जाते हैं।
वास्तुशास्त्र के अनुसार घर में यदी अखंड रूप से मिट्टी के दीपक जलाएं तो कई तरह के वास्तुदोष में कमी आती है।शाम के समय घर के परंडे पर दीपक जलाने से पितृदोष के साथ ही वास्तुदोष भी शांत होता है।
दक्षिण-पूर्व दिशा में मिट्टी का दीपक लगाने पर घर में किसी तरह का अभाव नहीं रहता।
घर में कभी भी उत्तर-पूर्व कोने में दीपक ना लगाएं। इस कोने में दीपक लगाना वास्तु के अनुसार उचित नहीं माना जाता है।
श्री रामचरित मानस का पाठ अखंड दीपक के सामने करने से घर का वास्तुदोष खत्म हो जाता है।
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घर में रहेगी सुख- शांति हमेशा——-

वास्तु के अनुसार घर में कुछ बातों का ध्यान रखने से घर में हमेशा सुख-शांति बनी रहती है।
यदि आप भी चाहते हैं कि आपके घर में भी हमेशा सुख-शांति रहे तो बस जरुरत है,वास्तु के इन कुछ छोटे-छोटे टिप्स को ध्यान रखने कि
– घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक या ऊं का चिन्ह लगाने में सुख शांति बनी रहती है।
– नार्थ-ईस्ट दिशा में पानी का कलश रखें।
– ड्राइंग रुम में ताजा फूलों का गुलदस्ता रखें। इससे घर में सुख और शांति का स्थाई निवास होता है।
-रसोईघर में पूजन का स्थान नहीं होना चाहिए।
– बेडरुम में भगवान या धार्मिक चित्र नहीं लगाना चाहिए।
– घर के पूजन स्थल की दीवार से शौचालय की दीवार के संपर्क में नहीं होना चाहिए।
– घर के वातावरण को ऊर्जात्मक रखने के लिए घर की आंतरिक सज्जा में ये ध्यान रखना चाहिए कि घर के किसी भी कोने में अंधेरा ना रहे।
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घर का माहौल रहेगा खुशनुमा———-

मान्यता है कि यदि व्यक्ति वास्तु के हिसाब से बने घर में रहता है, तो उसका जीवन सुख एवं समृद्घि से पूर्ण होता है। यदि आपके घर में हमेशा कलह का माहौल बना रहता है। घर के सदस्यों में कभी आपसी तालमेल नहीं बन पाता है तो इस बार हम आपको वास्तु से संबंधित छोटे-छोटे उपाय बताते हैं जिनसे आपके घर का माहौल हो जाएगा खुशनुमा ।
– ऐसे पंखों को तुरंत ठीक करवाएं जिससे जो घर्र-घर्र की आवाज पैदा करते हों। पंखें से आने वाली आवाज आपके निजी जीवन में कलह पैदा कर सकती है।
– घर के किसी भी सदस्य या पारिवारिक लोग, रिश्तेदार जो जीवित हैं, उनकी तस्वीरें उत्तर-पूर्व, उत्तर या पूर्व तीनों दिशाओं में लगाई जा सकती हैं तथा घडिय़ां व दर्पण भी इन्हीं दिशाओं में लगाए जाते हैं। पूर्वजों की तस्वीर दक्षिण-पश्चिम, दक्षिण या पश्चिम में लगा सकते हैं।
– फेंगशुई के अनुसार ड्रैगन एक शक्तिशाली, शुभ प्रतीक है। जीवन में सौभाग्य और संपदा प्राप्त करने के लिए हमें शक्ति, साधन और सुरक्षा की आवश्यकता होती है।
– ड्राइंग रुम में ताजे फूलो का गुलदस्ता जरूर रखें।
– रोज क्वाट्र्ज का पेड़ मन को शांत करता है और गुस्से को काबू में रखता है। फेंगशुई के अनुसार इससे घर में शांति बनी रहती है।
– घर में कभी बंद घड़ी ना रखें। कोशिश करें कि जो घड़ी उपयोग में नहीं आ रही हो उसे घर में ना रखें।
– बेडरुम में नाचते हुए मोर का चित्र लगाएं।
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कृष्णा की तस्वीर दूर करेगी वास्तुदोष——

श्री कृष्ण का हर स्वरूप इतना सुन्दर है। उनके हर स्वरूप के दर्शन से मन सकारात्मक उर्जा से भर जाता है। वास्तु के अनुसार घर में कृष्ण की तस्वीर लगाना बहुत शुभ माना गया है, तो आइए जानते की घर के किस कोने में कृष्ण के किस स्वरूप की तस्वीर शुभ फल देने वाली मानी जाती है।
– कृष्णा का मक्खन खाता हुआ चित्र रसोई घर में लगाना वास्तु के अनुसार बहुत शुभ माना जाता है।
– संतान सुख की प्राप्ति के लिए श्री कृष्ण के बालस्वरूप का चित्र बेडरुम में लगाएं।
– ध्यान रखें कि कृष्ण का फोटो स्त्री के लेटने के समय बिल्कुल मुख के सामने की दीवार पर रहे।
– यूं तो पति-पत्नी के कमरे में पूजा स्थल बनवाना या देवी-देवताओं की तस्वीर लगाना वास्तुशास्त्र में निषिद्ध है फिर भी राधा-कृष्ण की तस्वीर बेडरूम में लगा सकते हैं।
– भवन में महाभारत के युद्ध दर्शाने वाली तस्वीर वास्तुशास्त्र के अनुरूप नहीं माना जाता इसलिए ऐसे चित्र घर में न लगाएं।
– भगवान श्रीकृष्ण का चित्र आवासीय एवं व्यावसायिक दोनों ही स्थानों पर रखा जाना चाहिए, इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
– भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला के दृश्यों की तस्वीरों को भवन की पूर्व दिशा पर लगाया जा सकता है।
– वसुदेव द्वारा कृष्ण को टोकरी में लेकर नदी पार करने वाला फोटो को घर में लगाने से घर से कई तरह की समस्या दूर होने लगती है।
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ऐसी फेंगशुई सजावट होती है शुभ—–
आजकल अधिकांश लोग घर बनवाते समय वास्तु का विशेष ध्यान रखते हैं। लेकिन कम ही लोग ऐसे हैं जो घर की सजावट में वास्तु या फेंगशुई का ध्यान रखते हैं। यदि घर की सजावट फेंगशुई आइटम्स से की जाए तो घर सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है।
– मछलियाँ, दर्पण, क्रिस्टल, घंटी, बाँसुरी, कछुआ, , सिक्के, लाफिंग बुद्धा आदि घर में सकारात्मक उर्जा के प्रवाह को बढ़ाने का कार्य करते हैं। – हाथी का जोड़ा संतान इच्छुक दम्पति के कमरे में रखना बहुत शुभ माना जाता है। इसे मुख्य द्वार के पास लगाना सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
– घर में एक्वेरियम रखने से घर की सकारात्मक उर्जा में वृद्धि होती है। – ड्रेगन के मुंह वाला जीवन यान घर की सुख-समृद्धि के साथ ही परिवार की आयु में वृद्धि की द्योतक है। – मछली जल की प्रतीक होती है और फेंगशुई में जल एक प्रमुख तत्व है। यह धन का प्रतीक है। जल की उपस्थिति घर या कार्यालय में माँगलिक ऊर्जा की सूचक है, जिसका फल सौभाग्यवद्र्धक होता है। – मछली परीक्षा में सफलता, नौकरी में पदोन्नति एवं उपलब्धि की प्रतीक मानी जाती है।
– फेंगशुई की मान्यता के अनुसार लाफिंग बुद्धा घर में रखने से घर में हमेशा खुशी और प्रसन्नता का माहौल बना रहता है।
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कोना-कोना होगा वास्तुदोष से मुक्त—————–

र बनाते समय वास्तु का ध्यान ना रख पाएं हो या अज्ञानतावश घर में कोई वास्तुदोष रह गया हो तो बने हुए भवन में तोड़-फोड़ करना बहुत मुश्किल होता है। इसलिए यदि मकान के निर्माण के समय यदि घर के किसी भी कोने में कोई वास्तु दोष रह गया हो तो नीचे लिखे वास्तुटिप्स अपनाकर आप घर के वास्तुदोष में कमी ला सकते हैं।
– यदि किसी के घर में पश्चिम दिशा में दोष हो तो ऐसे में घर के मुख्य दरवाजे पर काले घोड़ेे की नाल लगाएं साथ ही शनि यंत्र की स्थापना करें क्योंकि वास्तु के अनुसार पश्चिम दिशा का स्वामी शनि होता है। –
उत्तर-पूर्व यानी ईशान्य कोण का स्वामी गुरु होता है। इस कोने में वास्तुदोष होने पर परिवार को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इस दिशा के वास्तुदोष को समाप्त करने के लिए एक घड़े में बरसात पानी भरकर उसे मिट्टी के पात्र से ढ़ककर ईशान्य कोन में दबा दें।
– दक्षिण-पश्चिम कोने यदि नीचा हो तो इसे ऊंचा करने के लिए टी.वी. का एंटिना लगाएं इससे इस कोण का वास्तुदोष दूर होता हैं।
– अग्रि कोण या दक्षिण पश्चिम दिशा में दोष हो तो उस कोने में लाल बल्ब लगाएं।
– घर की छत के चारों कोने में तुलसी के पौधे लगाएं। इससे घर से कई तरह के वास्तुदोष दूर हो जाता है।
– सारा व्यर्थ और भारी समान दक्षिण दिशा में रखें इससे घर की सकारात्मक उर्जा में वृद्धि होती है।
बढ़ाएं सुन्दरता और दूर करे वास्तुदोष….
फेंगशुई के अनुसार, क्रिस्टल-ट्री का उपयोग घर में सुख-समृद्घि, प्रतिष्ठा व शांति के लिए किया जाता है। रत्नो का पौधा सुनने में भी भले ही काल्पनीक लगे किन्तु वास्तविकता यही है कि चीनी पद्धति में इस पौधे का अधिक महत्व है। यह पौधा तरह-तरह के रत्नों और स्फटिकों का बना होता है। इसमें कई वैरायटीज होती हैं।
– कानलियन का पेड़ छात्रों को करियर बनाने में सहायता देता है।
– रोज क्वाट्र्ज का पेड़ मन को शांत करता है और गुस्से को काबू में रखता है।
– नवरत्न पेड़ नवग्रहों की शांति, सुख तथा पारिवारिक शांति के लिए उपयोग किया जाता है। एमेथिस्ट का पेड़ दिमागा का संतुलन बनाए रखता है।
– रंग-बिरंगे रत्नों से सजे इस पौधे को यदि घर के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में रखा जाएं तो निश्चित रूप से जीविका चलाने वाले व्यक्ति के सौभाग्य में वृद्धि होती है।
– इसे घर में दक्षिण-पूर्व दिशा में भी रखा जा सकता है। इसे व्यवसायिक स्थल पर रखने से सम्पदा मिलती है।
– इसे बैठक में भी रखा जा सकता है। इसका एक ओर महत्वपूर्ण कार्य नकारात्मक ऊर्जा को दूर करना भी है।
अगर फ्लेट में हो वास्तुदोष…
अगर आप रेंट पर फ्लेट लेते हैं तो मकान मालिक की बिना मंजुरी के किराए के मकान में परिवर्तन नहीं कर सकते। अक्सर देखने में आता है कि वास्तु नियमों के अनुकूल बने भवन में किराएदार सुखी और संपन्न रहते हैं।
यदि आप भी चाहते हैं कि आपके घर में किसी तरह का वास्तुदोष ना रहे तो कुछ बातों का ध्यान रखकर किराए के भवन में रहते हुए भी वास्तुदोष दूर किया जा सकता है।
– भवन का उत्तर-पूर्व का भाग अधिक खाली रखें।
– दक्षिण-पश्चिम दिशा के भाग में अधिक भार या सामान रखें।
– पानी की सप्लाई उत्तर-पूर्व से लें।
– शयनकक्ष में पलंग का सिरहाना दक्षिण दिशा में रखें और सोते समय सिर दक्षिण दिशा में व पैर उत्तर दिशा में रखें। यदि ऐसा न हो तो पश्चिम दिशा में सिरहाना व सिर कर सकते हैं। – भोजन दक्षिण-पूर्व की ओर मुख करके ग्रहण करें। – पूजास्थल उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित करें यदि अन्य दिशा में हो तो पानी ग्रहण करते समय मुख ईशान (उत्तर-पूर्व) कोण की ओर रखें। ऑफिस के लिए फेंगशुई टिप्स… ऑफिस का वास्तु सम्मत होना बहुत आवश्यक है चूंकि ऑफिस में काम करने वाले कर्मचारियों व अधिकारियों का अधिकांश समय यहीं गुजरता है। फेंगशुई बा-गुआ पद्धति के अनुसार किसी भी घर को या ऑफिस को काल्पनिक रूप से नौ भागों में बांटा गया है। बा-गुआ के अनुसार उत्तर-पश्चिम कोने को व्यापारिक संबधित कोना माना गया है इसलिए इस कोने के फेंगशई का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
– वायव्य कोने में सुन्दर फूलों का गमला लगाएं।
– कम्प्यूटर, कंट्रोल पैनल, विद्युत उपकरण आदि कार्यालय के आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) में ही लगाए जाने चाहिए।
– चित्र, पशुओं या प्रसिद्ध हस्तियों के चित्र लगाना भी अच्छा माना जाता है।
– यदि ऑफिस के इस हिस्से में क्रिस्टल लैम्प जलाएं या झाड़ फानूस लगाएं।
– घर और व्यवसाय में कार्य करने वाले लोगों का यदि आपको सहयोग नहीं मिल पा रहे है तो वायव्य कोण में संगठित रूप से कार्यरत लोगों की तस्वीर लगाना लाभ होता है।
– उत्तर-पश्चिम हिस्से में सफेद रंग का अधिकाधिक प्रयोग करना चाहिए। –
यदि ऑफिस में वेटिंग रूम बनवाएं तो वायव्य कोण (पश्चिम-उत्तर) उचित रहेगा। कान्फ्रेंस/मीटिंग हॉल भी वायव्य कोण में शुभ माना गया है। घर में नहीं रहेगी दरिद्रता यदि आपके घर में पैसा नहीं टिकता। पैसा जितनी तेजी से आता है उससे कही ज्यादा तेजी से खर्च हो जाता है यानी आमदनी अठन्नी और खर्चा रूपैया है तो घर में दरिद्रता रहने के कई कारण है। उसमें से ही एक कारण है कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान ना रखना। –
पूजा घर के अग्निकोण में पूजा करें।
– उत्तर-पूर्व में लकड़ी का मन्दिर रखें जिसके नीचे गोल पाए हों।
– लकड़ी के मन्दिर को दीवार से सटाकर न रखें।
– जहां तक हो सके पत्थर की मूर्ति न रखें, वजन बढ़ेगा।
– घर में टूटे बर्तन व टूटी हुई खाट नहीं होनी चाहिए, न ही टूटे-फूटे बर्तनों में खाना खाएँ। इससे दरिद्रता बढ़ती है।
– घर के द्वार पर जो उत्तर दिशा की ओर हो वहाँ पर अष्टकोणीय आईना लगाएँ।
– उत्तर-पूर्व के भाग में दीपक जलाना घातक सिद्ध हो सकता है। इस कोने में हवन करने से व्यापार में घाटा प्राप्त होता है।
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समृद्धि के लिए जरूरी है——-

घर के अंदर ईशान्य कोण यानी उत्तर-पूर्व कोने को वास्तु के अनुसार गुरु ग्रह का कोना माना जाता है। इसलिए इस कोने की सफाई को सबसे ज्यादा महत्व दिया गया है।वास्तु में इसी कोने को पूजास्थल, उपासना स्थल और प्रधान इष्ट देव स्थापना का योग्य कोण भी माना जाता है, किंतु यहां जल स्थान का होना बहुत ही लाभकारी है। यदि इस कोने में नीचे लिखें वास्तु टिप्स अपनाएं तो घर में सुख-समृद्धि बढऩे के साथ ही घर की सकारात्मक उर्जा में वृद्धि होने लगती है मतलब समृद्धि के लिए घर के ईशान्य कोण के वास्तु का ध्यान रखना सबसे ज्यादा जरूरी है।
– इस कोने में तांबे के कलश में पानी भरकर उसमें पंच रत्न डाले। कलश का पानी रोज बदले।
– ईशान्य कोण में पारद का शिवलिंग स्थापित कर उसका नियमित रूप से अभिषेक करने से घर में उपस्थित हर तरह के वास्तुदोष का प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगता है।
– घर के ईशान कोण में जलस्रोत का होना बहुत शुभ है। आजकल इस कोण में बोरिंग करवाने का चलन है, किंतु वहां जलस्रोत या हौज का होना शास्त्र सम्मत है। यह शिव का स्थान है। इसी कारण इसे गंगा तुल्य माना जाता है।
– यदि इस जलस्रोत में चांदी की छोटी-सी मछली, शंख, मकर, लघु कलश, कल्पवृक्ष और चांदी का ही कूर्म बनाकर रखा जाए और पूजा के बाद जल भरा जाए तो इच्छित परिणाम मिलता है। ईशान के जल-स्रोत को बराबर भरा रखा जाए और उसके जलस्तर को बराबर बनाए रखा जाए तो समृद्धि आती है।
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अगर घर के मुख्यद्वार में हो वास्तुदोष…
यदि घर का मुख्यद्वार गलत दिशा में बना हो या द्वार दोष हो तो नीचे लिखे वास्तुटिप्स जरूर अपनाएं।
– पूरे घर में ची मुख्य द्वार से घर में प्रवेश करती है।
अत: मुख्यद्वार के सामने किसी तरह की रूकावट या अवरोध नहीं होना चाहिए।
– मुख्यद्वार के सामने पिल्लर, फर्नीचर जूते का रैक, टूटी वस्तुएं आदि घर में नकारात्मक उर्जा में वृद्धि करते हैं।
– घर में प्रवेश करते समय सामने बाथरूम या किचन न हो बाथरूम होने पर दरवाजा बंद रखें।
– मुख्यद्वार के सामने किचन होने पर, किचन के द्वार पर गणेश जी तस्वीर लगाएं।
– मजबूत दरवाजे घर में सकारात्मक ऊर्जा को लाते हैं।
– घर के मुख्य द्वार के सामने सीढ़ी नहीं होनी चाहिए।
. तो नहीं होगी पैसों की तंगी फेंगशुई और वास्तु दोनों के बारे में आश्चर्यजनक तथ्य है कि वास्तव में इनसे जीवन की कई सारी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। यदि आपके जीवन में पैसों की तंगी है तो नीचे लिखे वास्तु और फेंगशुई टिप्स आपकी मदद कर सकते हैं।
– घर के मुख्य दरवाजे के दोनों तरफ ही खिड़कियां हों तो जातक हमेशा जीवन में धन की तंगी महसूस करेगा। इससे बचने के लिए दोनों खिड़कियों पर बेल या मनी प्लांट का पौधा लगाएं।
– घर में यदि कोई नल टपक रहा हो तो उसे तुरंत बदलवाएं क्योंकि वास्तु के अनुसार यदि नल से व्यर्थ पानी बहता है, तो फालतु खर्च बढऩे लगता है।
– यदि दक्षिण- पूर्व दिशा में यदि वाशरुम बना है या नल लगा है तो उसका उपयोग तुरंत बंद कर दें ।
– उत्तर- पूर्व में यदि शौचालय बना हो तो उसका उपयोग तुरंत बंद कर दे हो सके तो घर में दूसरी जगह पर शौचालय बनवाएं।
– टेबल पर ताजे फूलों के रखने से भाग्योदय होता है। इसके अलावा बैंबू प्लांट या मनी प्लांट को भी टेबल पर रखा जा सकता है। ध्यान रखें कि फूल या पौधे को टेबल पर बाईं ओर ही रखें।
– घर के उत्तर में एक्वेरियम या कोई भी ऐसी कलात्मक चीज, जिसमें पानी हो, रखना फायदेमंद होता है।
– तीन टांग वाला मेंढ़क जो मुंह में सिक्का लिए हुए हो, समृद्धि को आकर्षित करता है। इसे अपने घर के मेन गेट के ठीक पास अंदर आते हुए प्रदर्शित करें। यह ध्यान रखें कि इसे सम्मानित जगह पर किसी टेबल के ऊपर रखा जाए। यह आपके मार्ग में आती हुई लक्ष्मी को प्रदर्शित करेगा।
– मोती शंख को अपने वर्क टेबल पर रखें इससे धन से जुड़ी सारी समस्याएं समाप्त हो जाती है।
– घर में कभी भी रात को झूठे बर्तन ना छोड़े। तो भाग्य देने लगेगा साथ अगर आप को हर काम में असफलता ही मिलती है। मनचाही सफलता नहीं मिल पा रही है तो आप नीचे लिखे फेंगशुई उपाय को जरूर अपनाएं।
– चीनी ड्रैगन को शक्ति, अच्छे भाग्य और सम्मान का प्रतीक मानते हैं। ड्रैगन एक कीमती कास्मिक ‘चीÓ बनाता है जिसे ‘शेंग चीÓ भी कहते हैं, जिससे घर और कार्यस्थल पर भाग्य साथ देता है।
– डबल ड्रैगन को यूं तो किसी भी दिशा में रखा जा सकता है लेकिन पूर्व दिशा में रखना सबसे ज्यादा लाभदायक है। चीनी संस्कृति और फेंगशुई में ड्रैगन को बहुत सम्मान दिया जाता है और इसे शुद्ध मानते हैं।
– यह ड्रैगन लकड़ी, सेरेमिक व धातु में उपलब्ध है। लकड़ी के ड्रैगन को दक्षिण- पूर्व या पूर्व में, सेरेमिक, क्रिस्टल के ड्रैगन को दक्षिण- पूर्व, उत्तर-पूर्व या उत्तर पश्चिम में रखा जाना चाहिये। -छात्र इसे अपनी पढ़ाई की टेबल पर रखें। घर की उत्तर-पश्चिम दिशा में इसे रखने से अच्छे सलाहकार, दोस्त व बढिय़ा नेतृत्व करने वाले साथी मिलेंगे।ध्यान रखें: यह जिस उंचाई पर रखा हो वह आंख के स्तर से अधिक न हो।
एक्वेरियम या क्रत्रिम फाउन्टेन के पास रखने से भाग्य ज्यादा साथ देता है।
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वास्तुदोष दूर करता है नमक ——-
आपके घर में यदि वास्तुदोष हो या हमेशा दरिद्रता रहती हो। पैसा कहां से आता है और कहां चला जाता है पता ही नहीं चलता है। इस परेशानी से निजात पाने के लिए अपने घर में हमेशा थोड़ा साबुत नमक जरूर रखें।
साबुत नमक रखने का कारण यह है कि नमक में पॉजिटीव एनर्जी को अपनी तरफ आकर्षित करने की क्षमता होती है। साथ ही यह नकारात्मक उर्जा को घर से दूर करता है। इसलिए घर में कोई भी शुभ काम करने जा रहे हों तो नमक डालकर पौछा जरूर लगाएं।
मन में खिन्नता, भय, चिंता होने से, दोनों हाथों में साबुत नमक भर कर कुछ देर रखे रहें, फि र वॉशबेसिन में डाल कर पानी से बहा दें।
नमक इधर-उधर न फेंकें।नमक हानिकारक चीजों को नष्ट करता है।फफूंदी भी नहीं लगने देता।
अगर ना लगता हो मन पढ़ाई में…
आजकल अधिकतर विद्यार्थियों की यह समस्या होती है कि उन्हें याद नहीं रहता है या पढ़ाई में उनका मन नहीं लगता है। ऐसी समस्या अक्सर घर के स्टडीरुम में उपस्थित वास्तुदोष के कारण होती है। इस समस्या के समाधान के लिए जरुरी है कि विद्यार्थी का कमरा वास्तुसम्मत हो। अगर आप भी चाहते हैं कि आपके बच्चे का मन पढ़ाई में लगे तो नीचे लिखे वास्तुटिप्स का ध्यान अध्ययन कक्ष में जरुर रखें।
– टेबल को दक्षिण-पश्चिम या दरवाजे के सामने न लगाएं क्योंकि इससे पढ़ाई में मन नहीं लगता है।
– टेबल को दरवाजे या दीवार से सटाकर कभी ना लगाएं इसे वास्तु के अनुसार ठीक नहीं माना जाता है।
– उत्तर-पूर्व में हरियाली से भरे चित्र लगाना भी अच्छा रहता है।
– पढ़ाई के कमरे में ज्यादा सामान ना रखें।
– अगर संभव हो तो कमरे में पूर्व दिशा में नाचते हुए गणेश का चित्र लगाएं।
– स्मरण व निर्णय शक्ति हेतु दक्षिण में टेबल सेट कर उत्तर या पूर्व की ओर मुँह कर अध्ययन करें। उत्तर-पूर्व विद्यार्थी को योग्य बनाने में सहायक होती है।
– विद्या की देवी माँ सरस्वती को प्रणाम कर अध्ययन शुरू करें।
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बिजनेस में होने लगेगा तेजी से धन लाभ—–
सफल व्यापारी बनना आपका सपना है। अपने व्यापार में यदि आपको जबरदस्त सफलता चाहिए तो इसके लिए जरूरी है कि व्यापार स्थल पर आपकी बैठक और तिजोरी वास्तु के अनुसार हो तो आपको व्यापार में लगातार बिना किसी घाटे की सफलता मिलने लगेगी।
वास्तु शास्त्रियों के अनुसार चुंबकीय उत्तर क्षेत्र कुबेर का स्थान माना जाता है जो कि धन वृद्धि के लिए शुभ है। यदि कोई व्यापारिक वार्ता, परामर्श, लेन-देन या कोई बड़ा सौदा करें तो मुख उत्तर की ओर रखें। इससे व्यापार में काफी लाभ होता है।
इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी है कि इस ओर चुंबकीय तरंगे विद्यमान रहती हैं जिससे मस्तिष्क की कोशिकाएं सक्रिय रहती हैं और शुद्ध वायु के कारण भी अधिक ऑक्सीजन मिलती है जो मस्तिष्क को सक्रिय करके स्मरण शक्ति बढ़ाती हैं। सक्रियता और स्मरण शक्ति व्यापारिक उन्नति और कार्यों को सफल करते हैं।व्यापारियों के लिए चाहिए कि वे जहां तक हो सके व्यापार आदि में उत्तर दिशा की ओर मुख रखें तथा कैश बॉक्स और महत्वपूर्ण कागज चैक-बुक आदि दाहिनी ओर रखें। इन उपायों से धन लाभ तो होता ही है साथ ही समाज में मान-प्रतिष्ठा भी बढ़ती है। क्यों लगाएं दौड़ते हुए घोड़े की तस्वीर? क्या आपका काम में मन नहीं लगता? काम करना तो चाहते हैं पर आपका ध्यान दूसरी ही जगह भटकता रहता है। जीवन में इतनी समस्याएं हैं कि एक जाती है तो दूसरी आ जाती है। कभी आप अपना काम सहीं से नहीं कर पाते हैं। दिमाग में एक साथ कई सारे विचार कौंधने लगते है और विचारों में आप इतना खो जाते हैं कि आप काम शुरू करने से पहले ही अपने आप को उर्जाहीन महसुस करने लगते हैं। यदि आपके साथ भी यही समस्या है तो ज्योतिष के अनुसार आपको अपने घर के स्टडी रुम में बगुले की तस्वीर लगाना चाहिए। साथ ही आप अगर हमेशा खुशी से भरे रहना चाहते हैं तो अपने कार्यस्थल पर दौड़ते हुए सफेद घोड़े का चित्र लगाएं। अगर आप छोटी- छोटी बातों पर मायुस हो जाते है तो अपने बेडरुम में नाचते हुए मोर का चित्र लगाएं। अपने ऑफिस केबिन पर टेबल की पीछे की दीवार पर पर्वत का चित्र लगाएं। घर के ईशान्य कोण में झरने का चित्र लगाएं।
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नहीं आएगी कभी आर्थिक परेशानी——
आजकल इस बढ़ती महंगाई के जमाने में अधिकांश मध्यमवर्गीय परिवारों को पैसों की तंगी का सामना करना पड़ता है। अगर आप भी आर्थिक रूप से परेशान है। पैसों की तंगी से जीवन मुश्किल हो गया है।
कुछ वास्तुटिप्स ऐसे हैं जो आपको पैसों की कमी से छूटकारा दिलवा सकते हैं।
– घर में लक्ष्मी का निर्बाध आगमन होता रहे इसके लिए हो सके तो घर की पूर्व दिशा में बांस का पेड़ लगाएं, अगर ऐसा करना संभव न हो तो मुख्य द्वार के दोनों तरफ छह इंच लंबी बांस की लकड़ी लटकाएं। जीवन में आर्थिक परेशानियां कभी नहीं आएगी।
– घर के मुख्यद्वार के पर श्री गणेश की मूर्ति लगाएं।
– तिजोरी में मोती शंख लाल कपड़े में बांधकर जरूर रखें।
– शनिवार के दिन घर की विशेष रुप से साफ-सफाई जरूर करें।
– अग्रिकोण में यदि कोई जलस्त्रोत हो तो उसे तुरंत वहां से हटवाएं।
– आपके फ्लैट का मुख्य द्वार यदि लिफ्ट के सामने खुलता है तो ऐसे परिवार के मुखिया का भाग्य और भविष्य दुर्भाग्य की गर्त में चला जाता है। इस विषम परिस्थिति से बचने के लिए मुख्य द्वार पर अष्टकोणीय दर्पण को लगवाएं।
– घर का मुख्य द्वार किसी निर्माण की वजह से ढक जाए या दूर से दिखाई न दे तो इस दुष्प्रभाव से बचने के लिए घर के मुख्य द्वार के नीचे छह सुनहरे सिक्के पंक्तिबद्ध होकर गाडें।
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अगर चाहिए सुकून भरी नींद——
कहते हैं चैन की नींद हर किसी के नसीब में नहीं होती है।
हर व्यक्ति सूकून भरी नींद चाहता हैं लेकिन आजकल अधिकतर लोगों के साथ अनिद्रा की समस्या होती है। इसका कारण अधिकतर शारीरिक होता है लेकिन कई बार इसका कारण आपके घर का वास्तु भी हो सकता है। अगर आपको भी लगता है कि आपके घर का वास्तुदोष आपकी नींद में खलल डाल रहा है तो नीचे लिखे वास्तुटिप्स जरूर अपनाएं।
– किसी भी कमरे का सामान बिखरा हुआ नहीं होना चाहिए। जो वस्तु जहां से उठाई हो या जहां रखते हों वहीं रखें।
– प्रथम मंजिल में स्टोर का होना अशुभ है। नकारात्मक ऊर्जा के साथ सामान लाने ले जाने में भी असुविधा होती है। यदि आपके शयन कक्ष के ऊपर स्टोर अथवा कबाड़ा हो तो हर वक्त आपको इसका अहसास होता रहेगा और आप ठीक से सो नहीं पाएंगे।
– यदि घर में अधिक अंधेरा रहता हो, दीवारें ऊबड़-खाबड़ हों, दीवारों में दरारें हों तो शारीरिक कष्ट व संघर्षपूर्ण जीवन होता है। ऐसा नहीं होने दें।
– दीवारों पर गहरा रंग हो तो उसे हल्का करवा दें।
– यदि कीलें ठोकने या अन्य कारणों से दीवार में खड्डे हो गए हों तो तत्काल प्लास्टर करवा दें या उस पर कोई तस्वीर टांग दें ताकि खड्डे दिखाई न दें। तो घर भर जाएगा सकारात्मक ऊर्जा से अगर आप चाहते हैं कि आपका घर हमेशा सकारात्मक उर्जा से भरा रहे तो इसके लिए आप नीचे लिखें वास्तुटिप्स जरूर अपनाएं। आप अपने को घर को सकारात्मक उर्जा से भरा महसूस करेंगे।
– मेहमान को चाय या पानी सर्व करते समय केतली या जग का मुंह मेहमान की ओर न करें, इससे उत्पन्न नकारात्मक ऊर्जा मेहमान को नाराज कर सकती है।
– घर में थोड़े-थोड़े दिनों में किसी ना किसी बहाने सामूहिक भोज का आयोजन अवश्य करते रहें।
– टूटी-फूटी क्राकरी में सामान परोसने से नकारात्मक ऊर्जा विचरण करती है। इससे आपका आत्मविश्वास कमजोर होता है।
– पार्टी या फं क्शन में बचा खाना-खाने से गरीबी आती है।
– आपके घर के मेहमान आएं, इसके लिए खाने की मेज के चारों तरफ तीन कुर्सियां जरूर रखें।
– यह भी ध्यान रखें कि भोजन कक्ष में ज्यादा फर्नीचर न हो। क्योंकि ज्यादा फर्नीचर से उर्जा के बहाव में बाधा उत्पन्न होती हैं। बांसुरी लगाकर हटाएं वास्तुदोष कहते हैं बांसुरी का संगीत इतना सम्मोहक होता है कि हर कोई इस संगीत की तरफ सहज ही आकर्षित हो जाता है। इसलिए कृष्ण की बांसुरी सम्मोहन खुशी और आकर्षण का प्रतीक मानी गई है।
वास्तु के अनुसार भी घर में बांसुरी रखना बहुत शुभ माना गया है।
ऐसी मान्यता है कि बांसुरी में से गुजर कर नकारात्मक ऊर्जा सकारात्मक उर्जा में बदल जाती है। बांस के तने, बांसुरी छत के बीम की नकारात्मक ऊर्जा के दुष्प्रभाव को रोकने में कारगर हैं। इससे आपके घर का माहौल खुशनुमा रहेगा।साथ ही बांसुरी शांति व समृद्धि कर प्रतीक है।
घर के मुख्य द्वार के समीप बांसुरी लटकाएं। इससे घर की सकारात्मक ऊर्जा में बढऩे लगती है।
घर में सुबह-शाम शंख घंटी बजाएं।शंख ध्वनि व घंटी की मधुर आवाज से प्राणिक ऊर्जा में वृद्धि होती है।
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सफलता चाहते हैं तो अपनाएं ये वास्तु टोटके—————–

हर व्यक्ति रोज अपना सबसे ज्यादा समय अपने कार्यस्थल पर बिताता है। यदि कार्यस्थल यानी ऑफिस या व्यवसायिक स्थल का वास्तु ठीक हो तो व्यक्ति को काम करने के लिए सकारात्मक उर्जा मिलती है। यदि कार्यस्थल का वास्तु सही हो तो वहां काम करने वाला व्यक्ति दोगुनी उर्जा से काम करने लगता है। वास्तु नियम के पालन से उसे हर कार्य में सफलता मिलने लगते हैं।
-हमेशा अपने ऑफिस का केन्द्र स्थान हमेशा खाली रखना चाहिए, इसे ब्रह्म स्थान भी कहा जाता है। इस स्थान पर कोई खंबा, स्तंभ, कील आदि नहीं लगाना चाहिए।
– कम्पयूटर हमेशा दक्षिण-पूर्व या पूर्व दिशा में रखें।
– जो सामान जल्दी बेचना चाहते हों उसे वायव्य कोण अर्थात उत्तर-पश्चिम दिशा में रखें तो शीघ्र बिकेगा।
– ऑफिस की सजावट में कभी भी कांटेदार पौधे नहीं लगाने चाहिए।
– अगर ऑफिस में वेटिंग रुम बनाना हो, तो हमेशा वायव्य कोण में ही बनाना चाहिए।
– आपके केबिन में पीठ के पीछे कोई खुली खिडकी अथवा दरवाजा नहीं होना चाहिए।
– स्वीच बोर्ड या दक्षिण-पूर्व या दक्षिण दिशा में रखें।
– अगर आपके व्यवसाय में बाधा आ रही हो तो अशोक वृ्क्ष के 9 पत्ते कच्चे सूत में बाँधकर बंदनवार के जैसे बाँध दें।
पत्ते सूखने पर उसे बदलते रहें।
सेहत और भाग्य के लिए घर में लाएं बुद्धा
फेंगशुई के अनुसार बुद्धा की मुर्ति आज के इस युग में सुख का पर्याय मानी गई है। इस मुर्ति को अधिकतर घर में मुख्यद्वार के सामने लॉबी या बैठक कक्ष में रखी जा सकती है।
– मूर्ति का मुंह हमेशा मुख्यद्वार के सामने होना चाहिए और कुछ ऊंचाई वाले स्थान पर ऐसे स्थापित करें कि यह प्रवेश करते ही दिखाई दें।
– यह सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होती है। उसका हंसता हुआ चेहरा ऊर्जा का प्रतीक है।
– इस मूर्ति को शयनकक्ष, रसोईघर, बाथरुम, और शौचघर में नहीं रखा जाता।
– हंसते हुए बुद्धा की विशेष मान्यता है कि इसे खरीदना नहीं चाहिए, उपहार में मिले तो अच्छा है।
– लाफिंग बुद्धा को घर में रखना सौभाग्य प्रसिद्धि और संतुष्टी का सूचक है। इसे देखते ही चेहरे पर मुस्कुराहट आ जाती है।
– वुलू के साथ लिए लॉफिंग बुद्धा कई रंगों में मौजुद है, लेकिन यह सबसे ज्यादा महरुन रंग में पसंद किए जाते हैं। इनकी पीठ पर लटक रही छड़ी में दौलत की गठरी भी है।
– लॉफिंग बुद्धा घर में अच्छा भाग्य और सेहत का प्रतीक है। बुद्धा कभी भी घर के लोगों को परेशान नहीं होने देता , बल्कि परेशानियों को खुशियों में बदल देता है। क्या आप तनाव से परेशान हैं?
यदि आप घर में बहुत ज्यादा मानसिक दबाव महसुस करते हैं छोटी- छोटी बातों पर आपको टेंशन हो जाता है। सोते वक्त कुछ विशेष वास्तु नियमों का जरूर ध्यान रखें।
– यदि सोते समय शरीर का कोई अंग दर्पण में दिखाई देता है, तो उस अंग में पीड़ा होने लगती है। इस तरह सोने से बचें।
– बेड को दीवार से सटाकर ना लगाएं।
– यदि बक्से वाला बेड हो तो कोशिश करें कि उसमें कम से कम सामान रहे।
– सोते समय सिर या पैर किसी भी दरवाजे की ठीक सीध में नहीं होने चाहिए। इससे मानसिक दबाव बनता है।
– घर के सदस्यों की दीर्घायु के लिए स्फटिक का बना हुआ एक कछुआ घर में पूर्व दिशा में रखें।
– मछलियों के जोड़े को घर में लटकाना बहुत शुभ एवं सौभाग्यदायक माना जाता है। इनके प्रभाव से घर में धन की बरकत और कार्यक्षेत्र में उन्नति होती है। इन्हें बृहस्पतिवार अथवा शुक्रवार को घर में टांगना शुभ होता है।
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बच्चे कभी बीमार नहीं होगें अगर…
वास्तुशास्त्र में हर समस्या का निदान छिपा है। वास्तु से अच्छा स्वास्थ्य भी प्राप्त किया जा सकता है। कहा जाता है कि यदि वास्तु के सभी नियमों का पालन करें तो घर के सभी सदस्य निरोगी रहते है। – बच्चों के लिए सोने का कमरा घर की पूर्व या दक्षिण-पूर्व दिशा में बनवाएं।
– दक्षिण-पूर्व, उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा के कमरे नविवाहित पुत्रों के लिए ठीक नहीं है। इन दिशाओं के कमरों में निवास करने से वे बीमार हो जायेंगे।
– पुत्री का कक्ष दक्षिण दिशा में रखें। पुत्र का कक्ष पश्चिम दिशा में होना चाहिए।
– बच्चों का पलंग का सिरहाना पूरब दिशा की ओर सिराहना रखें। – अच्छे स्वास्थय के लिए शयन कक्ष में क्रिस्टल का गोला या विंड चाइम लगाएं।
– घर में अगर कोई बच्चा बहुत दिनों से बीमार हैं, तो उसे नेऋत्य कोण में सुलाएं।
क्यों लगाएं घर में पेड़-पौधे?
फेंगशुई का मानना है कि पेड़-पौधे समृद्धि के प्रतीक है। घर में नकारात्मक उर्जा को नष्ट करते हैं। यदि आप भी चाहते हैं कि आपका जीवन सुखी और समृद्ध हो तो घर में पौधे जरूर लगाएं।
– गोल आकार की पत्तियों वाले पौधे ऊर्जा दृष्टिकोण से बहुत शुभ होते हैं।
– लंबे और सीधे पत्ते वाले पौधे कम शुभ होते हैं।
– नींबु का पौधा एक मांगलिक पौधा है।
– छोटे व शुभ पौधों को मकान की पूर्व दिशा में उगाएं। इससे घर के मालिक का स्वास्थय सही रहता है। परिवार के लोग भी सुखी रहते हैं।
– घर या दफ्तर में कैक्टस का पौधा न लगाएं क्योंकि ये नकारात्मक उर्जा प्रदान करते हैं।
– फूल वाले पौधे प्रमाणिक उर्जा के बहाव में मदद करता है।
– व्यवसाय में सफलता प्राप्ति के लिए अपने ऑफिस में पूर्व दिशा में फूलों का पौधा लगाएं। फूल के पौधे से आश्चर्यजनकरूप से उर्जा वृद्धि करते हैं।
– पौधों के लिए गमला लेते समय ध्यान रखें गमला प्लास्टिक का ना हो।
– पौधे को लटकाने वाली टोकरी में लगाएं और इन्हे प्रत्येक को खिड़की के आगे लटका दें। सही दिशा में खिड़कियां देती हैं समृद्धि हम सभी के घर में दो तरह की उर्जा रहती है सकारात्मक उर्जा और नकारात्मक। सकारात्मक उर्जा समृद्धि देती है। नकारात्मक उर्जा सुख चैन छीन लेती है। यदि आप चाहते हैं कि आपका घर सकारात्मक उर्जा से भरा रहे तो इसके लिए आवश्यक है कि घर में खिड़कियां सही दिशा में हों। खिड़कियों से आने वाली सूर्य की रोशनी से घर का माहौल हमेशा सकारात्मक बना रहता है।
– भवन में उत्तर दिशा की खिड़कियों को अधिक समय तक खुला रखें। इससे भवन में रहने वाले सदस्यों के स्वास्थ्य को बहुत लाभ पहुंचता है।
– वास्तुशास्त्र के अनुसार पश्चिम दिशा में पूर्व व उत्तर की तुलना में कम खिड़कियां रखनी चाहिए।
– भवन के उत्तर में कम खिड़कियां रखनी चाहिए। इससे निवासियों को स्वस्थ संबंधी समस्याओं से निजात मिलती है।
– घर के पश्चिम भाग में खिसकाने वाली खिड़की हो होने से सिर दर्द, चिड़चिड़ापन आदि की समस्या होती है।
मकान की खिड़कियों के शीशे टूटे हुए न हो, न ही उनमें कोई दरार ना पड़े। इसका ध्यान रखें नहीं तो निवासियों को रक्त से संबंधित रोग हो सकता है।
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बेडरुम में हनीमून के फोटो?

घर के किसी भी कमरे की सजावट करते समय यदि वास्तु नियमों का ध्यान भी रखा जाएं तो सबंधों में और भी ज्यादा मिठास लाई जा सकती है। घर की और विशेषकर यदि शयनकक्ष की सजावट में तस्वीर लगाते समय सावधानी रखी जाए तो रिश्ते और भी ज्यादा प्रगाड़ होने लगते हैं।
– अपने शयन कक्ष में हनीमून के क्षणों का फोटो लगाने से वैवाहिक संबंधों में आश्चर्यजनक रूप से सुधार आता है।
– दीवारों पर नीला आसमानी रंग और गुलाबी रंग सजाएं।
– यदि पति-पत्नी के अधिक विवाद होते हों तो कमरे में नाचते हुए मोर की तस्वीर लगाएं।
– अगर आप चाहते हैं कि आपके जीवन साथी के साथ आपका सामंजस्य बना रहे तो कबूतर के जोड़े का चित्र कमरे में लगाएं।
ऐसे खुलेगा किस्मत का ताला..
घर, दुकान व्यवसायिक स्थल से वास्तुदोष मिटाना आवश्यक है। वास्तुदोष व्यक्ति हर गतिविधि को प्रभावित कर उसे असफल साबित कर देते हैं। यदि आप चाहते हैं कि आपको सफलता मिलें तो नीचे लिखे वास्तु उपायों को अपनाकर आप भी अपने किस्मत के ताले को खोल सकते हैं।
– ईशान्य कोण में एक जल कलश रखें और उसका किसी न किसी सोमवार को पूजन करें। घी या तेल का दीपक जलाएं।एक सौ आठ बार लक्ष्मी मंत्र का जप करें । कलश के जल को चारों दिशाओं में छींटे लगाएं और बचा हुआ जल पूजन स्थल पर डाल दें। इस प्रकार लक्ष्मी का वास सदा आपके घर में रहेगा।
– घर के अंदर और बाहर तुलसी और मौसमी का पौधा लगाएं।
– सुबह-शाम सामुहिक आरती करें।
– महीने में एक या दो बार उपवास करें।
– साल में एक दो-बार हवन करें।
– घर में अधिक कबाड़ एकत्रित ना होने दें।
– शाम के समय एक बार पूरे घर की लाइट जरूर जलाएं। इस समय घर में लक्ष्मी का प्रवेश होता है।
– घर में हमेशा चन्दन और कपूर की खुशबु का प्रयोग करें।
-झाड़ू हमेशा छुपाकर रखें। रात्रि के समय झाड़ू लगाने से लक्ष्मी नष्ट हो जाती है।
घर में हमेशा रहेगी पॉजिटीव एनर्जी….
सबको सुख शांति चाहिए और साथ ही सफलता चाहिए। ऐसी तमाम बातों के लिए फेंगशुई में कई उपाय ऐसे कारगर उपाय बताए गए हैं। जिनका इस्तेमाल कर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया जा सकता है।आप तीन पुराने चीनी सिक्कों को लाल रंग के धागे अथवा रिबन में बांध कर अपने घर के हैंडल में लटका सकते हैं। इससे घर के सभी लोग लाभान्वित होंगे।
ये सिक्के दरवाजे के अंदर की ओर लटकाने चाहिए न कि बाहर की ओर। घर के सभी दरवाजों के हैंडल में सिक्के न लटकाएं केवल मुख्य द्वार के हैंडल में सिक्के लटकाएं क्योंकि इससे घर में आने वाले हर व्यक्ति के प्रवेश के साथ ही घर की सकारात्मक उर्जा बढ़ती है।
आप दरवाजे के बाहर वाले हैंडल में छोटी घंटी भी लटका सकते हैं। यह घंटी आपके घर में अच्छे समय के प्रवेश का सूचक हैसिक्के घर में सम्पत्ति आ जाने के प्रतीक हैं, पिछले दरवाजे पर आपको एक भी सिक्का नहीं लटकाना चाहिए, क्योंकि पिछला दरवाजा इस बात का सूचक है कि इस मार्ग से होकर आपका कुछ न कुछ कैरियर में मिलेगी अपार सफलता…..
हर व्यक्ति अपनी शिक्षा, आर्थिक क्षमता के अनुसार अपना लक्ष्य निर्धारित करता है और उसे प्राप्त करने के लिए कोशिश करता है। अगर कोई व्यक्ति चाहता है कि उसे कैरियर में जल्द सफलता मिले तो उसे अपने घर के वास्तु में कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए।
– आपके घर या दफ्तर में आपकी नेमप्लेट आगुंतको को सपष्ट रूप से नजर आनी चाहिए। कैरियर में सफलता के लिए नेमप्लेट पर रात के वक्त रोशनी डालें।
– रोज सुबह उगते सुरज हाथों में जल लेकर उज्जवल भविष्य के लिए संकल्प करें और ईश्वर से अपने शक्ति और सामथ्र्य में वृद्धि के लिए प्रार्थना करें।
– कैरियर सौभाग्य वृद्धि के लिए घर के आंगन में तुलसी पौधा लगाएं।
– कैरियर में सफलता प्राप्ति के लिए उत्तर दिशा में जंपिंग फिश, डॉल्फिन या मछालियों के जोड़े का प्रतीक चिन्ह लगाए जाने चाहिए। इससे न केवल बेहतर कैरियर की ही प्राप्ति होती है बल्कि व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता भी बढ़ती है।
– कैरियर बनाने के लिए घर आपका ध्यान अपने लक्ष्य की ओर रहे इसलिए शयन कक्ष मेंवायव्य में पलंग लगाएं।
– अगर आप विदेश में अपनी किस्मत आजमाना चाहते हैं तो अपने कमरे में स्टडी टेबल पर एक ग्लोब रखें।
– दक्षिण दिशा की दिवार पर विश्व मानचित्र लटकाएं।
– घर की उत्तर दिशा में स्थित लॉबी या बॉल्कनी में एक सुन्दर सा छोटा वाटर फाउंटेन रखें। इसे रोज सुबह शाम जरूर चलाएं।
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तब घर में मिलेगा सुकून—————–
आज की भाग-दौड़ भरी और तनावपूर्ण जिंदगी में लोग यही चाहते हैं कि घर में उन्हें वह सारा सुकून मिले जिसकी उन्हें आशा है। जब भी घर सजाने की बात होती है तो हमें अलग-अलग तरह की वस्तुओं का ध्यान आता है पर आजकल इतना ही काफी नहीं है। यही वजह है कि लोग वास्तु का महत्व जानने लगे हैं। दरअसल वास्तु के अंतर्गत कुछ ऐसी बातों का समावेश है जिससे हमारी जिंदगी में पॉजिटीविटी आने लगती है।
– शयनकक्ष में मोटा कालीन बिछाना चाहिए। कालीन घर में ऊर्जा तापमान , रंगों व परिदृश्य को संतुलित व अवलोकित करते है। बैठकों और भोजन कक्षो को कालीनों से पूरा ढकना वास्तु के अनुसार सही नहीं है। – घर की सजावट पर्दे की भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। हल्के रंगों के पर्दे अधिक प्रकाश परावर्तित करते हैं। बैठक के कमरे में सकारात्मक उर्जा का स्तर बढ़ जाए इसलिए बैठक के कमरे में हमेशा हल्के रंग के परदे ही लगाए।
– शयनकक्ष में पर्दे उतने ही मोटे रखें, ताकि आवश्कता पडऩे पर एकदम से बाहरी प्रकाश अंदर आने से रोका जा सके।
– स्वास्तिक चिन्ह, लक्ष्मी गणेश के चिन्हों वाले स्टिकर या अपने धर्म के शुभ संकेतों को लगाएँ।
– ड्राइंग रूम में फर्नीचर लकड़ी का ही होना अच्छा माना जाता है। यह भी ध्यान रहे कि फर्नीचरों के कोने तीखे तथा नुकीले न होकर के गोल या चिकने होने चाहिए। तीखे कोने नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माने जाते हैं।
– बच्चों के कमरे का रंग नीला बैंगनी या हरा होना चाहिए। टेबल इस तरह से लगी होनी चाहिए कि पढऩे वाले का मुँह पूर्व या उत्तर में रहे तथा पीठ की ओर दीवार होनी चाहिए। इस कमरे में विद्या का वास होता है अत: बच्चों को जूते-चप्पल बाहर रखने की सलाह दें।
– सुन्दर लिखावट में लिखे कुछ मंत्र घर में सजाना बहुत शुभ माना जाता है।
– दर्पण प्राण उर्जा को सक्रीय करने के लिए घरों की सजावट में दर्पण का बहुमुल्य योगदान है। ये अनियमित आकार के कमरों को संतुलित करने या दुष्प्रभावो को दुर करने के लिए प्रयोग में लाते है। प्राकृतिक प्रकाश को अधिक से अधिक अंदर लाने के लिए इन्हें खिड़की के पास लगाना चाहिए।
घर का बिगड़ा वास्तु भी हो जाएगा ठीक… रसोईघर में अग्नितत्व, दिशा के स्वामी व काम आने वाली चीजों के सही रखरखाव का तालमेल हो जाए, तो घर का बिगड़ा वास्तु भी ठीक हो सकता है। केवल जरूरत है तो सिर्फ इन छोटे-छोटे वास्तुटिप्स को ध्यान में रखने की।
– खाना खाते समय गृहिणी की पीठ किचन के दरवाजे कि तरफ नहीं होना चाहिए। अन्यथा अशुभ ऊर्जा के प्रभाव से गृहिणी को कमरदर्द का सामना करना पड़ सकता है।
– फेंगशुई के अनुसार किचन में रखा चूल्हा भवन के मुख्य द्वार प्रवेश करते समय दिखना नहीं चाहिए।
– अग्रि व जल एक दूसरे के विरोधी तत्व है। इसलिए किचन में चूल्हे कि स्थिति सिंक या फ्रिज के सामने नहीं होना चाहिए।
– फेंगशुई के अनुसार किचन में रखा चूल्हा, भवन के मुख्य द्वार में प्रवेश करते समय नहीं दिखना चाहिए। उत्तर दिशा में रसोई और पूर्व दिशा में दरवाजा बंद होने पर भी ऊर्जा असंतुलित हो जाती है। पूर्व का दरवाजा खोल देने और किचन दक्षिण- पूर्व में कर देने से ऊर्जा का प्रवाह नियमित और संतुलित हो जाता है।
– किचन खुला और हवादार होना चाहिए। किचन में प्रवेश द्वार मुख्यद्वार के सामने होना चाहिए।
– किचन में चूल्हे और सिंक पास ना रखें। अगर ऐसो करना संभव नहीं है, तो सिंक चूल्हे एक क्रिस्टल बॉल लटका दें। पूरे घर में ऊर्जा प्रवाहित हो सके इसके लिए किचन को आग्रेय कोण में स्थान दें। अगर दक्षिण पश्चिम की ओर मुंह है तो घर की सुख-शांति पूरी तरह से भंग हो जाएगी।
– पश्चिम की ओर मुंह करके भोजन पकाने से त्वचा व हड्डी संबंधी रोग हो सकते हैं यदि उत्तर की ओर मुंह करके भोजन पकाया जाए तो आर्थिक हानि होने का भय रहता है।
– फेंगशुई में जल का रंग काला होता है। चूल्हा रखने का प्लेटफार्म काले रंग का नहीं होना चाहिए।
ऐसा हो घर तो निश्चित है भाग्योदय यदि कोई घर वास्तु के अनुसार बना हो तो आप अधिक ऊर्जावान बन सकते हैं। यह सकारात्मक ऊर्जा काम के साथ ही भाग्योदय में भी सहायक होती हैं। वास्तु के अनुसार ऐसा माना जाता है कि यदि घर का हर एक कोना वास्तु अनुरूप हो तो घर में आने वाले हर व्यक्ति को बहुत मानसिक शांति महसुस होती है और घर में रहने वाले हर सदस्य की तरक्की होती है।
– पूर्व दिशा ऐश्वर्य व ख्याति के साथ सौर ऊर्जा प्रदान करती हैं। अत: भवन निर्माण में इस दिशा में अधिक से अधिक खुला स्थान रखना चाहिए। इस दिशा में भूमि नीची होना चाहिए। दरवाजे और खिडकियां भी पूर्व दिशा में बनाना उपयुक्त रहता हैं। बरामदा, बालकनी और वाशबेसिन आदि इसी दिशा में रखना चाहिए। बच्चे भी इसी दिशा में मुख करके अध्ययन करें तो अच्छे अंक अर्जित कर सकते हैं।
– पश्चिम दिशा में टायलेट बनाएं यह दिशा सौर ऊर्जा की विपरित दिशा हैं अत: इसे अधिक से अधिक बंद रखना चाहिए। ओवर हेड टेंक इसी दिशा में बनाना चाहिए। भोजन कक्ष भी इसी दिशा में होना चाहिए।
– उत्तर दिशा से चुम्बकीय तरंगों का भवन में प्रवेश होता हैं। चुम्बकीय तरंगे मानव शरीर में बहने वाले रक्त संचार एवं स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से इस दिशा का प्रभाव बहुत अधिक बढ़ जाता हैं। स्वास्थ्य के साथ ही यह धन को भी प्रभावित करती हैं। इस दिशा में निर्माण करते समय विशेष बातों का ध्यान रखना आवश्यक हैं। उत्तर दिशा में भूमि रूप से नीची होना चाहिए तथा बालकनी का निर्माण भी इसी दिशा में करना चाहिए।
– उत्तर-पूर्व दिशा में देवताओं का निवास होने के कारण यह दिशा दो प्रमुख ऊजाओं का समागम हैं। उत्तर दिशा और पूर्व दिशा दोनों इसी स्थान पर मिलती हैं। अत इस दिशा में चुम्बकीय तरंगों के साथ-साथ सौर ऊर्जा भी मिलती हैं। इसलिए इसे देवताओं का स्थान अथवा ईशान दिशा कहते हैं।
– घर का मुख्य द्वार इसी दिशा में शुभकारी होता हैं। उत्तर-पश्चिम दिशा में भोजन कक्ष बनाएं यह दिशा वायु का स्थान हैं। अत: भवन निर्माण में गोशाला, बेडरूम और गैरेज इसी दिशा में बनाना हितकर होता है। सेवक कक्ष भी इसी दिशा में बनाना चाहिए।
– दक्षिण-पश्चिम दिशा में मुखिया का कक्ष सबसे अच्छा वास्तु नियमों में इस दिशा को राक्षस अथवा नैऋत्व दिशा के नाम से संबोधित किया गया हैं। परिवार के मुखिया का कक्ष परिवार के मुखिया का कक्ष इसी दिशा में होना चाहिए। सीढिय़ों का निर्माण भी इसी दिशा में होना चाहिए। इस दिशा में खुलापन जैसे खिड़की, दरवाजे आदि बिल्कुल न निर्मित करें। किसी भी प्रकार का गड्ढा, शौचालय अथवा नलकूप का इस दिशा में वास्तु के अनुसार वर्जित हैं। दक्षिण-पूर्व दिशा में किचिन, सेप्टिक टेंक बनाना उपयुक्त होता है। यह दिशा अग्नि प्रधान होती हैं। घर में नहीं होगी धन-धान्य की कमी घर में रखा गया हर सामान घर के वास्तु और हमारी विचारधारा को भी किसी ना किसी रुप में प्रभावित करता है। यदि घर का वास्तु ठीक हो तो किसी भी तरह की कोई कमी नहीं होती घर हमेशा धनधान्य से भरा रहता है।
– सामान्य तौर पर शुभ दिशा उत्तर है। ईशान कोण ऊर्जा का बेहतर क्षेत्र है। यह स्थान खुला निर्माण रहित व साफ -सुथरा होना चाहिए क्योंकि यहां से प्रवाहित होने वाली ऊर्जा पूरे घर को ऊर्जामय रखती है।
– ईशान कोण में भूलकर भी झाड़ू ना रखें।
– दक्षिण दिशा हल्की व खाली होने पर घर में ऊर्जा का संतुलन बिगड़ जाता है।
– भवन में भारी संदूक, सोफासेट , अलमारी , भारी समान का स्टोर दक्षिण- पश्चिम दिशा में रखें।
– पलंग का किनारा दक्षिण दिशा में करें। ऊर्जा संतुलन के लिए आवश्यक है। घर के धरातल का ढलान उत्तर-पूर्व व ईशान्य कोण की तरफ रखें।
– उत्तर और पूर्व दिशा नीची हल्की व खुली रखने से सूर्य का प्रकाश पूर्व से पश्चिम और चुंबकीय धाराएं उत्तर से दक्षिण बिना किसी बाधा के बहती है। धनधान्य की कमी नहीं होती।
– घर में अगर कोई बीमार हो तो उसे नेऋत्य कोण में सुलाएं।
– उत्तर- पूर्व की ओर मुंह करके पानी-पीने से पर्याप्त ऊर्जा भोजन को ऊर्जावान करके स्वास्थ्य को बहुत लाभ पहुंचाती है।
– अच्छी ऊर्जा के लिए घर के कोनों को खाली और साफ-सुथरा रखना चाहिए।
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कैसा हो पति-पत्नी का स्वीट रूम?

कई लोगों के वैवाहिक जीवन में छोटी-छोटी बातों को लेकर विवाद चलते रहते हैं। कई बार इन विवादों का कारण घर में फेंगशुई के दोष भी होते हैं। फेंगशुई के कुछ टिप्स जिनसे पति-पत्नी के बीच परस्पर प्रेम बढ़ता है- फेंगशुई के अनुसार घर के दक्षिण-पश्चिम भाग को आपसी रिश्तों के लिए एक्टिव माना जाता है। इसलिए इस भाग में सकारात्मक ऊर्जा को सक्रिय और नकारात्मक ऊर्जा को निष्क्रिय करने के लिए आप जो भी प्रयास करेंगे, वह बहुत फलदाई साबित होगा जैसे:
– अपना बिस्तर खिड़की के पास कभी भी न लगाएं। इससे पति-पत्नी के रिश्तों में तनाव और आपसी असहयोग की प्रवृत्ति बढ़ती है। फिर यदि खिड़की के पास बिस्तर लगाना पड़े तो अपने सिरहाने और खिड़की के बीच पर्दा जरूर डालें। इससे नकारात्मक ऊर्जा रिश्तों पर असर नहीं कर पाएगी।
– ऐसी चीज का प्रयोग करने से बचें जो अलगाव दर्शाती हो। छत पर बीम का होना या दो अलग-अलग मैट्रेस का प्रयोग भी अलगाव दर्शाता है।
– नवदंपतियों के लिए बिस्तर (गद्दा, चादर वगैरह) भी नया होना चाहिए। ये संभव न हो तो कोशिश करें कि ऐसी चादर या बिस्तर बिलकुल ही प्रयोग में न लाएं जिसमें छेद हो या कहीं से कटे-फटे हो।
– जिस पलंग पर दंपत्ति सोते हों उस पर किसी और को न सोने दें।
– दंपत्ति के पलंग के नीचे कुछ भी सामान न रखा जाए। जगह को खाली रहने दें। इससे आपके बेड के चारों ओर सकारात्मक ऊर्जा बिना किसी बाधा के प्रवाहित हो सकेगी।
– प्रवेश द्वार वाली दीवार के साथ अगर आपने अपना बेड लगा रखा है तो इससे बचें। इससे रिश्तों में कटुता आती है।
– उस दीवार से सटाकर अपना बेड न लगाएं जिसकी दूसरी ओर बाथरूम या टॉयलेट हो और न ही ऐसी जगह, जहां से बाथरूम या टॉयलेट का दरवाजा ठीक सामने दिखता हो। यदि ऐसा हो तो इसका दरवाजा हमेशा बंद कर के ही रखना चाहिए। इसकी नकारात्मक ऊर्जा रिश्तों पर विपरीत असर डालती है।
– बेड के सामने या कहीं भी ऐसी जगह शीशा नहीं लगाना चाहिए, जहां से आपके बेड का प्रतिबिंब दिखता हो। इससे संबंधों में दरार आती है और आप अनिद्रा के भी शिकार हो सकते हैं। यदि इसे टाला न जा सके तो आप शीशे पर एक पर्दा डालकर रखें।
-बेडरूम में वैसे तो कोई यंत्र टीवी, फ्रिज या कंप्यूटर आदि नहीं रखना चाहिए क्योंकि इनसे निकलने वाली हानिकारक तरंगे शरीर पर दुष्प्रभाव डालती हैं। पर यदि टीवी रखना ही पड़े तो उसे कैबिनेट के अंदर या ढंककर रखें। जब टीवी न चल रहा हो तो कैबिनेट का शटर बंद रखें।
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– रंगों का भी रिश्तों पर खासा असर होता है।
घर की दीवारों के लिए हल्का गुलाबी, हल्का नीला, ब्राउनिश ग्रे या ग्रेइश येलो रंग का ही प्रयोग करें। ये रंग शांत और प्यार को बढ़ाने वाले हैं। वास्तु: पाएं परीक्षा में अधिक अंक माता- पिता को बच्चों की पढ़ाई को लेकर हमेशा चिंता बनी रहती है। आजकल काम्पीटिशन इतना बढ़ गया है कि बच्चे भी अधिक अंक लाने के लिए खुब मेहनत करते हैं पर उनकी मेहनत का कई बार उन्हें उचित परिणाम नहीं मिलता है। कुछ बच्चों के साथ यह समस्या होती है कि उनका मन पढ़ाई करते समय एकाग्र नहीं होता है। कहा जाता है कि वास्तु और फेंगशुई से इस समस्या का निवारण संभव है।प्रकृति में सकारात्मक और नकारात्मक दो तरह की ऊर्जा प्रवाहित हो रही है। वास्तु फेंगशुई का काम है, दोनों ऊर्जाओं को संतुलित राखना और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देना। इसके लिए हमें वास्तु और फेंगशुई के कुछ साधारण नियमों का पालन करना चाहिए।
– बच्चों की पढ़ाई की मेज पर एज्युकेशन टावर रखें। जिससे ऊपर उठने की प्रेरणा मिलती है और एकाग्रता बढ़ती है।
– मेज के ऊपर किसी भी प्रकार का बीम छज्जा आदि नहीं होना चाहिए।
– मेज के ऊपर पिरामिड लगा सकते हैं। इससे पिरामिड की दीवारों से ऊर्जा टकराकर जातक के सिर पर पड़ती है। जिससे उसकी स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है।
– अध्ययन कक्ष में करने की मेज कभी भी कोने में नहीं होनी चाहिए। अध्ययन के लिए मेज कक्ष के मध्य में होनी चाहिए। दीवार से कुछ हटकर होनी चाहिए।
– बच्चों का मुंह पढ़ाई करते समय पूर्व या उत्तर दिशा में रहना चाहिए। इससे सूर्य का प्रकाश प्राप्त होता रहता है। जिससे बच्चे स्वस्थ रहते हैं। अध्ययन कक्ष में एकाग्रता हमेशा बनी रहती है।
– अध्ययन की मेज पर अधिक अनावश्यक पुस्तकें नहीं होनी चाहिए।
– बच्चे की सोने की दिशा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। सिर दक्षिण दिशा में होनी चाहिए।
– बच्चों के कमरे में टेलीफोन डीवीडी आदि मनोरंजन की वस्तुएं नहीं रखनी चाहिए। बाथरुम का वास्तु हो कुछ इस तरह… किसी भी घर का बाथरुम कैसा है? यह बात किसी आने वाले पर गहरा प्रभाव डालती है। बाथरुम का इंटीरियर किसी भी घर की शोभा होती है। हर घर के वास्तु में बाथरुम का भी विशेष महत्व होता है। इसलिए घर के इंटीरियर में वास्तु का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए।
– बाथरूम में पानी का बहाव उत्तर की ओर रखें।
– बाथरूम घर के नैऋत्य कोण में बनवाना चाहिए।
– अगर संभव न हो तो वायव्य कोण में भी बाथरूम बनवाया जा सकता है।
-गीजर आदि विद्युत उपकरण बाथरूम के आग्नेय कोण में लगाएं।
– बाथरूम में एक बड़ी खिड़की व एक्जॉस्ट फैन के लिए रोशनदान अवश्य हो।
– बाथरूम में गहरे रंग की टाइल्स न लगाएं। हमेशा हल्के रंग की टाइल्स का उपयोग करें।
– यदि बाथरूम का दरवाजा बेडरूम में ही खुलता हो तो उसे सदैव बंद रखना चाहिए तथा उसके आगे पर्दा लगा देना चाहिए।
– बेडरूम में बाथरूम नहीं होना चाहिए क्योंकि दोनों की ऊर्जाओं का परस्पर आदान-प्रदान स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं होता । सही दिशा में जलस्त्रोत से होगा धन लाभ घर में पानी की पूर्ति के लिए कुआं, बोरवेल या भूमिगत पानी के टैंक का निर्माण किया जाता है। वास्तु के अनुसार घर में पानी की व्यवस्था करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि घर में जलस्त्रोत गलत दिशा में न हो, मकान के निर्माण करते समय कुछ ऐसे वास्तु नियम है। जिनका पालन करने व्यक्ति अनेक जानी-अनजानी परेशानियों से छुटकारा पा सकता है।
– वास्तु के अनुसार पूर्व में जल स्रोत या टैंक बनवाने से ग्रह स्वामी के मान सम्मान और ऐश्वर्य में वृद्धि होती है।
– पश्चिम में होने पर मानहानि, शरीर की आंतरिक शक्ति और अध्यात्मिक भावना में वृद्धि होती है। – उत्तर दिशा में पानी का स्रोत लाभदायक और धन लाभ कराने वाला होता है।
– दक्षिण दिशा में जलस्रोत होना कष्टों को आमंत्रण देना है।
– पूर्व-ईशान कोण में होने पर अत्यंत शुभ व सौभाग्य प्रदान करने वाला होता है।
– उत्तर ईशान कोण में पानी का स्रोत होने पर आर्थिक उन्नति के अवसर बनते हैं।
– ये भी ध्यान रखें कि घर का किसी भी नल में से पानी का लगातार टपकना भी एक तरह का वास्तुदोष होता है। इससे घर में आमदनी से अधिक खर्च की समस्या बनी रहती है।
मन की प्रसन्नता के लिए अपनाएं वास्तु प्रयोग आजकल हर किसी की जिंदगी भागदौड़ से भरी है। हर कोई इस तरह अपने काम में लगा हुआ है कि मानसिक शांति का तो नाम ही नहीं है। किसी के भी पास अपने आप के लिए वक्त ही नहीं है। यदि आप चाहते हैं मानसिक तनाव से मुक्ति तो नीचे लिखे वास्तु प्रयोग जरूर अपनाएं।
– घर में जाले न लगने दें, इससे मानसिक तनाव कम होता है।
– दिन में एक बार चांदी के ग्लास का पानी पिये। इससे क्रोध पर नियंत्रण होता है।
– अपने घर में चटकीले रंग नहीं कराये।
– किचन का पत्थर काला नहीं रखें।
– कंटीले पौधे घर में नहीं लगाएं।
– भोजन रसोईघर में बैठकर ही करें।
– शयन कक्ष में मदिरापान नहीं करें। अन्यथा रोगी होने तथा डरावने सपनों का भय होता है।
– इन छोटे-छोटे उपायों से आप शांति का अनुभव करेंगे।
– घर में कोई रोगी हो तो एक कटोरी में केसर घोलकर उसके कमरे में रखे दें। वह जल्दी स्वस्थ हो जाएगा।
– घर में ऐसी व्यवस्था करें कि वातावरण सुगंधित रहे। सुगंधित वातावरण से मन प्रसन्न रहता है।
श्री गणेश की पूजा कर मिटाएं वास्तुदोषहिन्दू धर्म में गणपति को प्रथम पूज्य माना गया है। वास्तुशास्त्र में भी गणेश जी को कई जगह वास्तुदोषहर्ता के रूप में माना गया है। कुछ वास्तु नियम ऐसे हैं जिनकी अनदेखी करने पर उपयोगकर्ता की शारीरिक, मानसिक, आर्थिक हानि होती है। वास्तुदेवता की प्रसन्नता की कल्पना बिना गणेश आराधना के नहीं कि जा सकती है। इसलिए गणपति जी की पूजा कर कई तरह के वास्तुदोषों को शांत किया जा सकता है।
– घर में बैठे हुए गणेशजी लगाना चाहिए।
– घर में रोज गणेशजी की आराधना से वास्तु दोष उत्पन्न होने की संभावना बहुत कम होती है।
– घर के मुख्य द्वार पर एकदंत की प्रतिमा या चित्र लगाया गया हो तो उसके दूसरी तरफ ठीक उसी जगह पर दोनों गणेशजी की पीठ मिली रहे इस प्रकार से दूसरी प्रतिमा या चित्र लगाने से वास्तु दोष का प्रभाव कम होने लगते हैं।
– भवन के जिस भाग में वास्तु दोष हो उस स्थान पर घी मिश्रित सिन्दूर से स्वस्तिक दीवार पर बनाने से वास्तु दोष का प्रभाव कम होता है।
– घर या कार्यस्थल के किसी भी भाग में वक्रतुण्ड की प्रतिमा अथवा चित्र लगाए जा सकते हैं। किन्तु यह ध्यान अवश्य रखना चाहिए कि किसी भी स्थिति में इनका मुँह दक्षिण दिशा या नैऋत्य कोण में नहीं होना चाहिए।
– खड़े गणेशजी भी कायर्यस्थल पर लगाए जा सकते है। इस प्रतिमा के दोनों पैर जमीन का स्पर्श करते हुए हों। इससे कार्य में स्थिरता आने की संभावना रहती है।
– भवन के ब्रह्म स्थान अर्थात केंद्र में, ईशान कोण एवं पूर्व दिशा में सुखकर्ता की मूर्ति अथवा चित्र लगाना शुभ रहता है। किन्तु टॉयलेट अथवा ऐसे स्थान पर गणेशजी का चित्र नहीं लगाना चाहिए जहाँ लोगों को थूकने आदि से रोकना हो। यह गणेशजी के चित्र का अपमान होगा।
– सफेद रंग के विनायक की मूर्ति, चित्र लगाना चाहिए।
इससे घर में हमेशा समृद्धि बनी रहती है।
– सिन्दूरी रंग के गणपति की आराधना अनुकूल रहती है। इससे घर के सदस्यों का मन स्फूर्ति से भरा रहता है।
नक्काशीदार बर्तन से घर में रहेगी बरकतभारतीय कलाकृतिया काफी प्राचीन समय से ही मशहूर रही हैं। भारत के नक्काशीदार बर्तन मुख्य आकर्षण रहे हैं। नक्काशीदार बर्तन देखने में सुन्दर तो होते ही है साथ ही वास्तु सम्मत भी होते हैं। आजकल घर के कामकाज में प्रयोग होने वाले बर्तनों पर अब वैज्ञानिक दृष्टिकोण से नक्काशी की जाने लगी है।ये बर्तन थोड़े महंगे जरूर होते हैं पर इन्हे घर में रखना उतना ही शुभ भी होता है। इन कुछ खास बर्तनों में पीतल के बर्तन घर का वास्तुदोष दूर करेंगे। इन बर्तनों की नक्काशी इसी दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर बनाई जाती है।
इसके अलावा इनके आकार पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाता है। साथ ही यह भी बताया जाता है कि घर के किस हिस्से में रखने पर वास्तुदोष कम होगा।पीतल के बर्तन वैसे भी शुभ माने जाते हैं।
पीतल के बड़े आकार के इन बर्तनों पर भगवान के सूक्ष्म रूप की नक्काशी की गई है जो काफी शुभ मानी जाती है। यह सूक्ष्म नक्काशी वास्तुदोष को दूर कर घर को सुख-समृद्धि से भर देती है। इन्हें घर की दीवारों और दरवाजों पर रखा जाता है।वैज्ञानिक दृष्टि से ये बर्तन इतने शुभ हैं कि लोग इनमें गेहूँ-चावल भरकर अपने घरों में रखते हैं। इससे घर में धन-धान्य की बरकत बनी रहती है।
अधिकतर लोग इन बर्तनों को कला की दृष्टि से भी खरीदते हैं। नक्काशीदार बर्तन में जल भरकर उसमें पंचरत्न डालकर रखें और रोज उसका पानी बदले तो घर से बहुत सारे वास्तुदोष दूर होते हैं।नक्काशीदार बर्तन में घर में तुलसी का पौधा लगाने से घर में बरकत रहती है। नक्काशीदार चांदी की डिब्बी में गुरू पुष्य नक्षत्र में पीले चावल भरकर रखें। घर में हमेशा बरकत रहेगी।

तुलसी से दूर होगी शादी, संतान और नौकरी की समस्याएं तुलसी के पौधे को हिन्दू परम्परा में बहुत पूज्यनीय माना गया है। भारतीय परम्परा में तुलसी को प्राचीन समय से बहुत शुभ माना जाता है। इसे घर का वैद्य कहा गया है। इससे कई तरह की बीमारियां तो दूर होती ही है। साथ ही वास्तुशास्त्र के अनुसार भी इसे घर में रखने का विशेष महत्व माना गया है। तुलसी को घर में लगाने से कई तरह के वास्तुदोष दूर होते हैं। तुलसी के भी बहुत से प्रकार है। जिसमें जिसमें रक्त तुलसी, राम तुलसी, भू तुलसी, वन तुलसी, ज्ञान तुलसी, मुख्यरूप से विद्यमान है। तुलसी की इन सभी प्रजातियों के गुण अलग है।
– शरीर में नाक, कान वायु, कफ, ज्वर खांसी और दिल की बीमारियों पर खास प्रभाव डालती है।
तुलसी वो पौधा है जो जीवन को सुखमय बनाने में सक्षम है।
वास्तुदोष दूर करने के लिए इसे दक्षिण-पूर्व से लेकर उत्तर पश्चिम तक किसी भी खाली कोने में लगाया जा सकता है।
यदि खाली स्थान ना हो तो गमले में भी तुलसी के पौधे को लगाया जा सकता है।
– तुलसी का पौधा किचन के पास रखने से घर के सदस्यों में आपसी सामंजस्य बढ़ता है। पूर्व दिशा में यदि खिड़की के पास रखा जाए तो आपकी संतान आपका कहना मानने लगेगी।
– अगर संतान बहुत ज्यादा जिद्दी और अपनी मर्यादा से बाहर है तो पूर्व दिशा में रखे तुलसी के पौधे के तीन पत्ते रोज उसे किसी ना किसी तरह खिला दें।
– यदि आपकी कन्या का विवाह नहीं हो रहा हो तो तुलसी के पौधे को दक्षिण-पूर्व में रखकर उसे नियमित रूप से जल अर्पण करें। इस उपाय से जल्द ही योग्य वर की प्राप्ति होगी।
– यदि आपका कारोबार ठीक से नहीं चल रहा है तो तुलसी के पौधे को नैऋत्य कोण में रखकर हर शुक्रवार को कच्चा दूध चढ़ाएं।
– नौकरी में यदि उच्चाधिकारी की वजह से परेशानी हो तो ऑफिस में जहां भी खाली जगह हो वहां पर सोमवार को तुलसी के सोलह बीज किसी सफेद कपड़े में बांधकर कोने में दबा दे। इससे आपके संबंध सुधरने लगेगें। घर के सदस्यों में प्यार बढ़ाता है ये बाउल जिस तरह घर में शंख रखने को हिन्दू परम्परा में शुभ माना गया है। दक्षिणावर्ती शंख को हमारी परम्परा में लक्ष्मी का रूप और वामावर्ती शंख को नारायण माना गया है। दोनों को ही धन और सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला माना जाता है। इसी तरह फेंगशुई में भी मधुर ध्वनि उत्पन्न करने वाली विंडचाइम और सिंगिंग बाउल को भी घर में सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने वाला माना जाता है।
सिंगिग बाऊल चीनी मान्यता के अनुसार घर के सदस्यों में सामंजस्य बढ़ाने में सहायक होता है। यह किसी भी धातु जैसे सोना, चांदी, लोहा, स्फटिक आदि से बना हो सकता है। यह सिंगिंग बाउल कटोरेनुमा होता है। इस बाउल को लकड़ी से बजाया जाता है जिसे मुंगरी कहा जाता है।
पहले मुंगरी से कटोरी को धीरे-धीरे बजाया जाता है। उसके बाद मुंगरी को दांये से बांये घुमाने पर एक विचित्र सी ध्वनि उत्पन्न होती है।इसके नियमित प्रयोग से यह लय में बोलने लगेगी और इसका संगीत आपके कानों को मधुर लगने लगेगा। घर के सदस्यों में आपस में प्यार और सामंजस्य बढऩे लगेगा। क्यों बनाएं मुख्यद्वार के दोनों ओर स्वस्तिक? हिन्दू धर्म में किसी भी त्यौहार और उत्सव पर घर में रंगोली बनाना, स्वस्तिक बनाना और मांडने बनाना आदि का रिवाज है। ये प्रतीक चिन्ह जिनमें नदी, इन्द्रध्वज, स्वास्तिक, चन्द्रमरू आदि हैं। सभी बहुत शुभ माने जाते हैं। कई खुदाइयों में ऐसे अवशेष मिले, जिनमें तीन से चार हजार सालों पहले भी लोग अपने आवासों में अनेक प्रतीक चिन्ह बनाया करते थे। आज भी हम गांवों में देखते हैं कि मकान कच्चे हों या पक्के, उनकी बाहरी दीवारों को चित्रकला के माध्यम से सजाया जाता है।
ये चित्र बेल-बूटे नहीं, बल्कि इनमें मांगलिक चिन्हों का समावेश किया जाता है, मुख्य द्वार के दोनों ओर बना स्वस्तिक चिह्न नकारात्मक ऊर्जा को बाहर फेंककर हमारी रक्षा करता है। आजकल वास्तु दोष निवारण में स्वस्तिक पिरामिड का बहुतायत प्रयोग किया जा रहा है। मांगलिक चिन्हों का प्रयोग घर-मकानों व्यवसायिक स्थलों में परम्परागत रूप से चला आ रहा है। वास्तु निर्माण में पूजा-अर्चना के बाद से ही मांगलिक चिन्ह का प्रयोग आरंभ हो जाता है।ये चिन्ह हमारी धार्मिक भावनाओं से जुड़े होते हैं। इन्हें अपनाकर हम अपने अंदर शक्ति का अनुभव करते हैं।
ऐसा माना जाता है कि मुख्यद्वार पर इन चिन्हों को लगाने से घर में हर प्रवेश करने वाले व्यक्ति के साथ सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। इन्हें बनाने या इनको प्रतीक रूप से लगाने से घर में सुख-शान्ति एवं मंगलकारी प्रभाव उत्पन्न होते हैं। ये मांगलिक चिन्ह हमारी संस्कृति व सभ्यता की धरोहर हैं। संसार हर धर्म, हर सम्प्रदाय के लोग अपने-अपने धर्म से संबंधित मांगलिक चिन्हों का प्रयोग करते हैं। घर में क्यों बनवाएं पिरामिड? वास्तुशास्त्र और फेंगशुई के अनुसार घर में पिरामिड की आकृति बनवाने का विशेष महत्व है। घर में पिरामिड बनवाने के अनेक लाभ है। पिरामिड की आकृति को सकारात्मक उर्जा को आकर्षित करने वाली मानी जाती है। इसलिए प्राचीनकाल से ही चीन में घरों के ऊपर की आकृति पिरामिडनुमा बनाने का प्रचलन था।
– यदि घर को पिरामिड की अद्भुत शक्तियों का लाभ दिलवाना हो तो घर के मध्य भाग को अथवा किसी लिविंग रूम को ऊपर से पिरामिड की आकृति का बनवाएं।
– यदि घर के किसी भाग में पिरामिड का निर्माण करवाना हो तो उसका एक त्रिभुज उत्तर दिशा की ओर रखें, शेष त्रिभुज स्वत: ही दिशाओं के अनुरूप हो जाएंगे।
– मस्तिष्क की सक्रियता के लिए पिरामिड के नीचे बैठना लाभप्रद रहता है। मानसिक थकावट दूर होगी और अनिद्रा, सिरदर्द, पीठदर्द आदि में लाभ मिलेगा।
– लंबी बीमारी व शल्य क्रिया के बाद पिरामिड के नीचे बैठने से जल्दी आराम मिलता है।
– पिरामिड के नीचे रखी दवाइयां कई दिनों तक खराब नहीं होती, साथ ही उनका असर भी बढ़ जाता है।
– घर में पिरामिड का चित्र कभी नहीं लगाना चाहिए, यह नकारात्मक ऊर्जा देता है।
– यदि आपका ईशान ऊंचा हो और नैऋत्य नीचा हो तो नैऋत्य में छत पर पिरामिड की आकृतिनुमा निर्माण करते हुए नैऋत्य को ईशान से ऊंचा किया जा सकता है।
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